Thursday, 15 October 2020

पाते सन हमहूँ सखि / कवयित्री - कंचन झा

कविता 

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हरियर पात, जीवन संजोने

ता धरि हरियर रहइछ

जा धरि गाछक ताग पकड़ने

 जुड़ल ओकरे सँ रहइछ


थाप बसातक, जोड़गर अबइछ

सुटकल पात जे, नेह पबइछ

जेना करेजमे माईक साटल

नेन्ना, बुदरुक रहइछ।


कोनो पात जे, बड़का भ गेल

डंटी सँ ओ छिटकल रहइछ

कोना बचाओत गाछ ऐंठल केर

बसात नेने दूर जा पटकइछ।


तहिना हमहूँ, हे संगी सुनू

संस्कृति केर जँ मोल नै बुझबै

दूर फेकायब जा क कतौ

के चीन्हत आ ककरा चिन्हबै।

...

कवयित्री - कंचन झा 
कवयित्रीक ईमेल आईडी - kjha057@gmail.com
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Friday, 9 October 2020

ओ महात्मा गांधी अपन / कवि - हेमन्त दास 'हिम;

 गांधी जयंती पर विशेष 

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गांधीजीक भूमिकामे प्रसिद्ध अभिनेता जावेद अख्तर खान


देशक धरती मुक्त करौलनि, काटल सामाजिक बंधन
सच्चाई आ सादगी केँ ओ अजस्र स्रोत केँ नमन।
देशक उर मे बसल रहय छथि ओ महात्मा गांधी अपन।
महात्मा गांधी-2

अत्याचारी अंग्रेज सँ सभ देशवासी तड़पै छल
छूआछूत, जातिपात आ साम्प्रदायिकता केँ छल अनल
सत्याग्रह सँ शत्रु के भगा प्रेम सँ कयलनि अग्निशमन।
देशक उर मे बसल रहय छथि ओ महात्मा गांधी अपन।
महात्मा गांधी-2

धन अरजी मुदा अपना पर नहि, जन के वास्ते खरची
आत्मनिर्भर हो गांव गांव, तहि लेल कुटीर उद्योग, चरखी
हिंसा के जे दूर भगौलनि, बढ़ाओल हिंदीक प्रचलन।
देशक उर मे बसल रहय छथि ओ महात्मा गांधी अपन।
महात्मा गांधी-2
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कवि - हेमन्त दास 'हिम'
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Monday, 18 May 2020

छन-छनन-छन पायल बाजय / कवि - अजित आज़ाद

गीत

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छन-छनन-छन पायल बाजय
खन-खनन-खन कँगना
ताहि मिथिला मे भोरे-भोर
कोइली बाजय अँगना
गोड़हा-चिपड़ी पाथिककाकी
निपलनि गोसाउनक पीड़ी
माय दुआरि पर चाउर फटकिक'
कयलनि ठांओं-पीढ़ी
मैंयाँ रन्हती छठिक तस्मै
हुनके हिस्सा खड़ना
ताहि मिथिला मे...

मस्जिद मे अज़ान गूँजल त'
काँख लिधुरिया लठाढ़ि
आँचर उड़ियौती नहिरा मे
ससुरा मे लेती नुआ काढ़ि
हाथ हुनर छनिपैर झूमर छनि
आँखि मे सुन्नर सपना
ताहि मिथिला मे...

बैसल नहि भेटती मिथिलानी
बरु कतबो रौद-बरखा
नहि किछुओ तनचौती टकुरी
चलबे करतै चरखा
पढ़ि-लिखिकआइ परदेस मे बेटी
छोड़ा रहल छथि भरना
ताहि मिथिला मे...
....
कवि- अजित आज़ाद
कविक ईमेल आईडी- lekhakajitazad@gmail.com
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Friday, 8 May 2020

हमर बुद्ध - कविता और चित्र / चंदना दत्त एवं श्रेयसी दत्त

कविता 

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हमर बुद्ध

कतेक शुद्ध

कियेक एतेक चिन्ता

मगजक शोणित लाल

पसरल विश्व भरिमे

अहींक ज्ञान शांति, अहिंसाक

सब अप्पन कहलक

बनौलक अहांक प्रतिमा

मोटगर पेटवला

हंसैत बुद्धा

आ आइ कना रहल विश्वकें

चिन्ता तऽ जायजे ने

अबियौ हे महात्मा

अवतरण दिवसक शुभकामना.
........
कवयित्री - चंदना दत्त 
कलाचित्र - श्रेयसी दत्त 
कवयित्रीक ईमेल आईडी - duttachandana01@gmail.com
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Sunday, 3 May 2020

केकेएम नवम आभासी कवि सम्मेलन सह यात्रा-वृतांत प्रस्तुतिकरण दिनांक 25.4.2020

सेहन्ता लागलै रहल अपन काबिलियत पर

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सबसs पहिले बबली मीरा अपन प्रस्तुति देलथिन्ह।  हुनकर प्रस्तुति देशभक्तिपूर्ण कविता छल जेकर प्रदर्शन अद्भुत रहय-

कविता के बोल छेलै
भारत माँ की हृदय वेदना किससे कहूँ कैसे कहूँ
प्रस्तुति करण के बाद मीरा जी कानs लगलखिन से सबके बुझायल।

ओकर बाद दोसर नंबर पर सुजीत कुमार जे कविता सुनैलखिन ओहि में मुनव्वर राणा जी के कविता के आगू बढ़ेलखिन। बोल रहै -
१) जो भी सुनती है तो हवाएं वो हैरान हुआ जाता है*
और दोसर ग़ज़ल के मतला

२) रात काली है चिरागों को जलाये रखना
सुबह करीब है हिम्मत को बनाए रखना
सुना के भाव विभोर कs देलखिन।

ओकर बाद तेसर नंबर पर .विजय बाबू मंच पर अपन कविता
 के  प्रस्तुति देलखिन।

कविता के बोल रहय-
लॉकडाउन लॉकडाउन में बारह की
बजाय साढ़े बारह हम तत्पर छी
थोड़य हार मानय बला हमहूँ छी

ओकर बाद चतुर्थ कवि के रूप में .बी के कर्ण जी के देशभक्तिक कविता के प्रस्तुति भेल जैह में भारत के खेल के गुणगान और क्षेत्रभक्तिक इक्छा व्यक्त कयल गेल छल। आओर उम्मीद केला की ६ करोड़ के आबादी में १ टा ओलंपिक मैडल चाही।
शीर्षक रहे
मिथिला के लेल १ ओलंपिक मैडल

कविताक बोल छेलै
मोन मुरझाएल अछि अपन व्यक्तित्व पर
सेहन्ता लागलै रहल अपन काबिलियत पर

तखन पंचम कवि के रूप में ज्ञानवर्धन  एक टा कविताक प्रस्तुति कयलथिन्ह जाहिमे देशभक्तिक संग पूरा भारत समाहित छल।

तखन आखिर में  अमन आकाश  अपन यात्रा वृतांत "बस टू पटना" सुनौलथिन्ह जाहिमे एक टा विद्यार्थी बाहर पढ़ै ला पठाबय पर कोन कोन दिक्कत होईछ और माँ बाप के अलावा समाज ओहि बालकक प्रति अपन की चारणा बना लय छै से सब सुनय लेल भेंटल।

एक टा फकरा सुना  अमन आजुक अभिभावकक मोनक दशा के जीवंत कs देलथिन्ह-
फकरा छेलै -
बिगड़ल बेटी बने नर्स
बिगड़ल बेटा पढ़े कॉमर्स

एवम प्रकारे आई ५ टा कविता सुनय ला भेटल और एक टा यात्रा वृत्तांत जे जीवंत,सुंदर,और सामायिक छेलै।

तहि दुआरे हम .बबली मीरा, सुजीत कुमार, .विजय कुमार .बी के कर्ण, ज्ञान वर्धन एवं .अमन आकाश के बहुत बहुत धन्यवाद दै छी। एक बार पुनः हम .विजय बाबू के सफल एवं सुगठित कवि सम्मेलन के मंच संचालन के दुआरे बहुत बहुत बधाई और धन्यवाद दै छी।

विजय बाबू, .विनय कर्ण, .आशीष  और .बी के कर्ण सs हम विशेषकर क्षमा माइंग रहल छी कि हुनकर हम बस प्रस्तुति करण के सबके समक्ष राखलौं । हम सदस्यगण मे बहुत छोट छी और त अगर हमर समीक्षा में कोनो त्रुटि रैह गेल होय त हमरा क्षमा करब।
........

रपटक लेखक - अभिनव मल्लिक 
प्राप्ति माध्यम - विजय बाबू
प्रतिक्रियाक लेल ईमेल - editorbejodindia@gmail.com



 




Friday, 24 April 2020

युवा प्रतिभा: - लॉकडाउन, लॉकडाउन देखै छी / कवि - विजय बाबू

कविता

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हिट स्प्रे करय छी-

लॉकडाउन लॉकडाउन देखय छी
घरे में दिन भरि बंद बैसल छी
भिन-भिन घूमि मच्छर चुटि काटी
तरे हम हरियर हिट स्प्रे करय छी ।

लॉकडाउन के अनुभूति करय छी
डरे सदिखन सोच में पड़ल छी
बाम कात गुनगुनेने, दहिना काटी
कोने कोने हम हिट स्प्रे करय छी ।

लॉकडाउन २१ बाद लॉकडाउन १९
दिने काटई में मशगूल रहय छी
हवा में मच्छर आ भूमि सँ झींगुर
धेने हम लाल हिट स्प्रे करय छी ।

लॉकडाउन बीच जूम झमाबै छी
डिजिटल दुनियाँ पसारि रहल छी
देखि चाल आ आवागमन फेर
बेर बेर हिट सभदिस स्प्रे करय छी 

लॉकडाउन लॉकडाउन में बारह की
बजाय साढ़े बारह हम तत्पर छी
थोड़य हार मानय बला हमहूँ छी
हिट स्प्रे में दिन-राति एक केने छी ।



अठबज्जर कोरोना

जो रे अठबज्जर चिनिया
बपौती के संभाल तू
 रे बज्जरखसौना मुरिमचरुआ
परा एत सँ, आब भाग तू,

कूटि देतौ आब ई दुनिया
रे तत् माइर खेमे तू
जो रे घूमय अप्पन नरक मे 
कोरोना आब बिलेमे तू ।

गिन दिन आब रे बैमंठा
जो अपन गाम के संभाल तू
बिन बजौने आयल मेहमान
बापे घर के कर देखभाल तू
......
.

कवि - विजय बाबू
कविक ईमेल - vijaykumar.scorpio@gmail.com
प्रतिक्रियाक लेल ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com


Wednesday, 1 April 2020

मचल अछि हाहाकार / कवयित्री - चंदना दत्त

कोरोना

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मचल अछि हाहाकार
चित्कार ओ प्रतिकार
सांचे बनि गेल विश्व एकटा गाम
सब अपने लेल हरान
काल्हि धरि जे विकासक चकरी घेमि रहल छल
दुनिता बस दौगैत जा रहल छल
थम्हि गेल ओ दौगय के उन्माद कतय धरि हैत विकास
ई विकास वा हैत विनाश
बच्चा अछि टुग्गर आ मायबाप असगर
घर मे औन्हल बासन
आ होटल  रमण चमन
गोर लगय मे अबैत अछि लाज 
चुम्माचाटी सं चलि रहल काज
जं कोरोना सिखोलक प्रणाम
त करैत छी हम एकरे नमस्कार बारंबार
मचल अछि हाहाकार
चित्कार आ हाहाकार.
.....
कवयित्री -चंदना दत्त
कवयित्रीक ईमेल - duttachandana01@gmail.com
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