Monday, 4 February 2019

पाहुन मिलन / विजय कुमारक कविता

 पाहुन मिलन



मास अछि माघि माथ पर फूसक चार
गोबर सौं नीपल आँगन सूरज बिन अनहार,
छी व्याकुल हमसब करि अपने मिलन
पाहुन, अछि मिथिला नगरी में हाँक इंतज़ार ।

दलान खपरैल कहुना क’ महफ़िल सज़ल
ठहाका पाहुन के लोक टोला के नै कम रहल,
दिन में खिलल धूप भेल राति में घूर मिलन
स्वागत अछि पाहुन अपनेक बार बार ।

चलल सिलसिला व्यंजन के भेल भोर सौं साँझ
तिलकोरक तरुआ संग माछ फेर पिज़्ज़ा तक
थारी पर पाहुन संग ‘चुन्नु-मुन्नू’ सहो बैसल
करियौ चाहे माँग पर घोर घमर्थन आर आ पार ।

भोर भेल फेर सौं मुँह फ़ूलल आकि पान भड़ल
तैयार पाहुन के मुख छल बड्ड चिक्कन चुनमन,
कहलाह जाईं छी फेर होयत सासुर में पुनः मिलन
क़हय मिथिला पाहुन के स्वागत करि बार बार ।
...

कवि -  विजय बाबू
छायाचित्र सौजन्य - विजय बाबू 
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल -editorbejodindia@yahoo.com

Wednesday, 16 January 2019

डॉ. शेफालिका वर्माक किछु मैथिली कविता / मीता आ अन्य

मीता !




तीतल हमर नोर सँ अहाँक ई 
मनमोहक चित्र ! 
किछ तुहिन कण मन पर 
व्यथिता रजनीक श्रम सीकर 
खसल आहत भ नीरव 
शून्य पीड़ा बनि भू पर ,,,,

धड़कि धड़कि फाटय छाती 
नित नित चिन्ता नवीन 
कोना बीती रहल ई अस्थिर 
जीवन दिन दिन 

आय दूर अहाँ हमरा सँ 
नीरव नोर झहरैत पल पल 
धो दिय विरह अमा हमर 
क दिय मधु राका निर्मल 

किछ संकेत भरल ओ उसाँस 
सिहरल प्राणक घर मे 
हमर अहाँक मिलन
 अछि मूक लिखल अम्बर मे 
तीर बनि बनि लागि रहल 
रिमझिमक गान मनभावन 
बरसि बरसि बीती रहल
संगिनी , आय आँखिक साओन 
मधुर विरक्तिक आकुलता 
घिरल हृदय गगन विचित्र 
मीता ! 
तीतल हमर नोर सँ 
अहाँक ई मनमोहक चित्र ,,,,
...


घर कतय हेरा गेल....


हमरा मोन पडैत ऐछ अपन घर
जे एकटा मंदिर छल
सरस्वतीक वास सन
मंगलमय वरदान सन ..............


दिसा दिसा सँ मधुर रागिनी अवैत छल
सरगम क ध्वनि गवैत छल
प्रेम प्रीति स भरल 
जीवन क गीत स साजल 
ओ हमर घर छल. 

पावैन तिहार क रंग स 
जितिया पावैन बड भारी--उगाह चान कि 
लपकों पुआ क नाद स ;अपन आनक 
उलहन-उल्लास स 
भंगक तरंग सन छल ओ जीवन .....

आय विस्थापित जकां एहि महानगर में 
भटकि रहल छी....
अपन आन लेल तरसि रहल छी ...
सौनसे शहर देवार स पाटल ऐछ
रहवाला क्यों नही 
उजहिया जकां लोग भागि रहल ऐछ 
लालसा लिप्साक व्यामोह में 
नहि जानि कथीक छोह में 

घर मात्र शरण लेवाक स्थान भ गेल 
एकटा अल्प विराम बनि गेल..नहि हास नै
विलास एते , नै उन्मुक्त जीवनक आस एते
घरबनैत अछ प्यार स दुलारस
हंसी स मजाक स , मुदा,
ईंट, पाथर,सीमेंट घरे नै मानवक ह्रदय पर 
प्लास्टर चढ़ा गेल 
प्यार ,ममता, आदर सब भाव प्लास्टर क 
नीचा दबा गेल 
हमर घर कते हेरा गेल.................
...


भावनाक सीता

प्राणक अकास में सजल स्मृति  
अहाँक छायल 
आँखि जेना साओन भादो बनि आयल 


उजड़ल एहि उपवन में 
सिहरत मधुमास क़त 
मन्दिर जखन स्वयं हेरायल 
तखन प्रतिमाक वास क़त 

अतुल वैभवक रानी 
स्वयं एकाकिनी 
नक्षत्र रंजित गगन में
चन्द्रविहीना यामिनी ,,,

ब्रह्म बेलाक मध्य असगर तारिका
स्वर्ण पिंजर बन्द भाग्यहीना सारिका 
अशोक वाटिका में बैसल 
उदासमना शोकाकुल 
भावनाक सीता 
अपन प्राणक दीप नेसि 
नेने सम्पूर्ण पूजन आराधन 
क रहलीह एकटा अंतहीन आश्रन्त 

प्रतीक्षा प्रतीक्षा प्रतीक्षा.
...


प्रकृति- पुरुष 
         
.सागरक  शांत लहरि देखी 
 किछ किछ होयत अछ मोन में
की सरिपों  नुकायल अछ सुनामी
एकर अंतर में ??
कखनो  कोसी क हुँकार
कखनो  गंगाक  आर्तनाद .......
हिमालयक  चंचला बेटी सब
सागरक छाती  सँ लागि जायत अछ
मुदा,
कोन वेदना  सागरक  सुनामी बनि 
जायत  अछ ..
मोन होयत  अछ
चीरी दी एहि रहस्य के
देखि ली  सागरक  छाती में बैसल
उपास्य के
किएक बेकल अछ पल पल
प्रतिपल
नै मेटैत  अछ तरास जकर
की अकास स मिलवाक आस एकर..
आतुर  अधीर
की व्यर्थहि  रहल  एकर पीर
नहि ते केकरो  पिआस मेटा पवैत अछ
नहि ते स्वयम अपन तरास
बुझि   पवैत अछ
युग युग सँ  तटक निर्मम रेत कें
भिजावैत  अछ
मुदा, किनार ओहिना  निर्विकार
निर्लेप  रही जायत  अछ
की ई  नियति प्रकृतिक  थीक
पुरुष  अपना के किनार बना  लैत छैक
भिजैत  अछ, तितैत  अछ
किछ बाजि  नहि पवैत  अछ
जीवनक   अर्थ   खोजिते रहि  जायत छैक......................
...
कवयित्री - डॉ. शेफालिका वर्मा 
कवयित्रीक पता  -    A ,103 , सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स, डीडीए  एचआईजी एफ, डॉ. मुखर्जी नगर, दिल्ली- 9 
मोबाइल नं. - 09311661847
ईमेल  -  shefalika1943@gmail.com
प्रस्तुति - हेमन्त दास 'हिम'
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com

कवयित्री मैथिली कें अति-प्रतिष्ठित कवयित्री आ लेखिका छथि. हिनका अपन मैथिली जीवनी "किस्त किस्त जीवन" वास्ते 2012 ई. मे साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल छैन्हि. पटना के एकटा प्रसिद्ध महाविद्यालय मे हिंदी विषयक प्राध्यापिका के पद पर कार्यरत छलीह. ई मैथिली संगहि हिंदी आ अंग्रेजी के सेहो बड़ नीक कवयित्री छथि. 








Saturday, 12 January 2019

Small Bites (Maithili)


1. संजू दासक बनाओल चित्र वीरेन्द्र मल्लिक रचित पुस्तकक आवरण / 12.1.2018/ संजू दास एतय क्लिक करू


Friday, 26 October 2018

मैथिली केँ प्राथमिक स्तरक भाषा बनाब' लेल माँग


मैथिली भाषा केँ प्रथमिक शिक्षाक माध्यम बनाब'  लेल जोर-शोर सँ प्रयास भ' रहल छै.



सामग्री सौजन्य- शिव कुमार मिश्रा

Tuesday, 16 October 2018

कनी बाजि दिऔ आ आन मैथिली कविता / अरुण कुमार लाल दास

कनी बाजि दिऔ!


हे  प्रिये  !
कनी  बाजि  दिऔ
कतेक  भाव  छी 
अहाँ  मन मे  छुपौने 

खंजन  नयन ,
गुलाबी  ई  चितवन 
ऊठय , लहर  मारय
हिलकोर  मन मे
बहल जा रहल जनु 
सरिता  शराबी

अधर क हँसी  मृदु
गुलाबक  कली  हो 
हमरा   मोताबिक  
कनी  साजि  लियौ,
हे  प्रिये ! 
कनी  बाजि  दिऔ.



बाढिक संत्रास 

प्रकृति केहन निष्ठुर भेल देखू
झमझम वर्षा बरिस रहल अछि 
भीजल वसन चिलकाक कोर मे
टुकड़ा चानक चमकि रहल अछि  

कोठा सोफा सजल बिछौना
थहा थही मे गृहणी कनियाँ
लह लह करैत धन खेती सब 
गदगद मालिक आ बनिहारक 
मुस्की आ मुस्कान लिखै छी
समय के हम सम्मान लिखै छी ।
बान्ह टुटल कोशी कछाड़ मे
मिनटहि मे सब भेल हतप्रभ
के भागत आ कोना क भागत
कथी समेटी की धय राखी,
चौकी पर चौकी गेटय मे 
लागल गृहपति आ नेना सब
की लय भागि जाइ जल्दी सँ
त्राहि करैत इन्सान लिखै छी
समय भेल बेइमान लिखै छी

गाय भैंस सब तोरलक खूंटा
मांउ मांउ करै पररू सब
बकड़ी छकड़ी सब भसियायल
बच्चा बुच्ची नेना भुटका
भूखे आकुल व्याकुल भ क
खोजि रहल छथि तीमन टटका
     
गृहपति लागल छथि जोगाड़ मे
ससरि जाइ सब क्यो मिलि झटका
क्यो ककरो घुरि नहि देखैत अछि 
सबहक सांस अटकि गेल छै
एहन पराभव  छल नहि देखल 
धैयॅक इम्तिहान लिखै छी 
समय बहुत बलवान लिखै छी ।

कहाँ नाह आ कहाँ पुछारी
सब किछु भासि गेल भंवर मे
बचल न चुटकी भरि दाना घर मे ,
पुल पुलिया मे फसल लहासक
गणना होइत अनुमान देखै छी
अपना के अपने स सानत्वना  दैत, 
कथा महान लिखै छी
समय बहुत बलवान लिखै छी
बाढिक ई संत्रास भयंकर 
दुदिॅनक हम निदान तकै छी
मिथिला बासी होउ अग्रसर
जन जन के आह्वान लिखै छी.
..............
कवि- अरुण कुमार लाल दास 
निवास -मधुबनी

कविक आत्मम-परिचय :

बचपन स साहित्यक प्रति लगाव रहल। सतत किछु किछु पढैत लिखैत रहलौं । कथाकार कें रूप मे मुन्सी प्रेमचंद हमर सबसॅ प्रिय कथाकार छथि ।ताहि दिन मिथिला मिहिर पत्रिका छपैत छल । मैथिली अपन मात्रृभाषा रहने बहुत पियरगर अछि । हरिमोहन झाक रंगशाला मे डूबि जाइत छलहुॅ । मिथिला मिहिर मे नेना भुटकाक चौपाड़ि मे वाल कथा सब लिखैत  रही। प्रकाशित सेहो होइत रहल । दस पनरह कथा सेहो प्रकाशित भेल छल हमर लिखल।बैंक मे अधिकारी रहैत  कहियो काल पढि लैत  छलहुॅ साहित्य के नाम पर किछु मुदा लिखब संभव नहि भ' सकल स्टेट बैंक स रिटायर भेला सन्ता किछु पहिलका रूचि फेर जागल अछि त ओकरे मुतॅरूप देबय मे लागल किछु किछु पढैत लिखैत कविता आ लघुकथा सेहो लिखने छी। लिखिए रहल छी । हिंदी मे सेहो  किछु कविता लिखलहुॅ अछि  ।आगां सेहो प्रयास जारी रहतै।अहाॅ सभक सहयोग अपेक्षित अछि ।


Sunday, 7 October 2018

रौशन जनकपुरी रचित पुस्तक पर शैलेंद्र नारायण मल्लिकक विचार


शुभेच्छा


हमर लंगाेटिया राेशन जनकपुरी जे भातिजाे छैथ, हुनक नेपाली भाषामे लिखल एकटा बहुमूल्य कृति ( नेपालका प्रदर्शनकारी कला, प्रादेशिक अनुसन्धान, प्रदेश नं.२) टटकाटटकी प्रकाशित पुस्तक पढलहुँ । ३१० पृष्ठक एहि पाेथीमें सम्पूर्ण मिथिला-भाेजपुराक इतिहास, संस्कृति-कला परम्पराक कथा-व्यथाके चित्रणक संगहि सप्तरीसँ पर्सा जिल्लाधरिक समग्रक्षेत्रक अावश्यक विश्लेषण कयल गेल अछि । मित्र राेशन जनकपुरीके र्इ कृति हुनक विद्वताके अद्वितीय प्रस्तुति अछि अा र्इ हमरालेल गाैरवक विषय अछि ।

प्रस्तुत अनुसन्धानात्मक पुस्तकमे सप्तरीसँ पर्सामध्य हरेक जिल्लाक भाैगाेलिक परिवेश अा नदीसभक चर्चाके संगहिजिल्ला सभक सदरमुकामके एेतिहासिक पृष्ठभूमि अा अाेहि जिल्ला अन्तर्गत स्थित प्रसिद्ध स्थल, स्थानिय भाषा,विविध संस्कृति,धर्म अा जीवन शैलीक समन्वित समाजक यथार्थ चित्रण कयलगेल पक्ष एवं इतिहास अा एहिक्षेत्रक कला,साहित्य नाटक अा संगीतक लाेक अा अाधुनिक पक्षक अध्ययनक गहिरार्इके पुष्टि करैत अछि । सप्तरीसँ पर्सा जिल्लाधरिक समग्र इतिहास, संस्कृति अा कला-साहित्यक विविध विधाक जानकारीकलेल जिज्ञासु लाेकनिक हेतु र्इ पुस्तक यथाेचित सहयाेगी भ, सकैछ से हमर विश्वास अछि ।

अन्त्यमें, भविष्याेमें अहू सँ गहन अा परिष्कृत कृति प्रकाशित हेतैन्ह से अपेक्षा रखैत मित्र राेशन जनकपुरीके उत्तराेत्तर प्रगतिक कामनाक संग प्रकाशित एहि कृतिक लेल बहुतरास बधार्इ ।...
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आलेख- शैलेंद्र नारायण मल्लिक
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प्रतिक्रिया हेतु ईमेल- editorbiharidhamaka@yahoo.com