Sunday, 18 August 2019

कर्पूरी देवी - मिथिला चित्रकला केँ विश्व तक पहँचबैमे योगदान दैबाली चित्रकार (पुण्य तिथि - 30.7.2019)

शत शत नमन कर्पूरी दादी 

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बौआ एहि अवडेरल धीया पूता के मनसँ पढाएब त खूब नाम जश भेटत। सुहागवती रहू सिउथे कोइखे भरल रहू।
एतेक नीक नीक शिक्षा आशीष देबय वाली मौसी दाय (कर्पूरी दादी) शानदार जीवन बीता इहलोकक यात्रा पर चलि गेलीह 30 जुलाई 2019 क।

मिथिला चित्रकलाके विश्वस्तर पर पहुंचाबयमे हितकर बहुत योगदान  छलनि। मधुबनीके परौल गामवासी कर्पूरी देवी कर विवाह रान्टी कर शिक्षक श्यामकांत दास सँ भेल छलनि। मिथिलाक आने बेटी जँका इहो माय सँ अरिपन सुजनी  कुरूस कांटाक लूरि सीख क आयल छलीह।

1934क भूकम्पग्रस्त मिथिलाक फोटो लेबाक क्रम मे जिलाधीश डब्लू जी आर्चर साहेब अपना देशमे पठेलक त खसल देवाल परहक भित्ति चित्र के देखि मिथिला के चित्रकला के  धूम मचि गेल छल। आ मिथिला चित्रकला के प्रोत्साहन के लेल कागज पर उतारबाक लेल परदा  छोडि बाहर जाय वाली महिला सभमे एक छलीह।

हमरो सबके चित्रकलालेल प्रोत्साहित करय वाली दादी जापान सहित फ्रांस अमेरिका जाए अपन कलाकेँ खुट्टा गारय एलखिन्ह।
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आलेख - चन्दना दत्त
लेखिकाक ईमेल - duttchandana01@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com






सिद्धांतक परिपाटी / कंचन कंठ

 सिद्धांत - मैथिल समाज मे विवाह हेतु सहमतिक घोषणा
 सात पुश्त तक वंशावलीक आधार पर विवाहक अधिकार जाँचक पश्चात

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सिद्धांत:एक परिपाटी अछि कर्ण कायस्थ में। कर्ण कायस्थक महत्वपूर्ण भाग मे जखन विवाह तय होईत छैक;तऽ ओ पूर्णतः दहेज रहित होईत छैक। जतय संपूर्ण देश दहेजक विभिषिका सौं त्रस्त अछि ओतय कर्ण समाज अपन एहि व्यवस्था के अक्षुण्ण रखने अछि। 

एहि समाज में संतान के लगभग समाने अवसर भेटेय छैन्हि परिवार मे। विवाहक लेल जेना आन समाजमे खरीदफरोख्त के दौर चलैत अछि ताहि के अहिठाम निंदनीय आ कुकृत्य बुझना जाई  छैक। एतय लड़कीवला ओ लड़कावला केँ खर्च लगभग समान होईत छैक।

एकर अतिरिक्त 'कथा' सुनिश्चित भेला सँ  पहिने पंजिकार वर ओ कान्या के पितृपक्ष ओ मातृपक्ष दुनू के यदि रक्तसंबंध कतहु नहि  रहल त पंजीकार अपन अनुमति दैत छथि - ई भेल एकर वैज्ञानिक पक्ष! जाहि पर कि आब वैज्ञानिक सब शोध कऽ रहल छथि जेनेटिक साइंस में आ प्रमाणित कयल कि ऐहेन विवाह स्वास्थ्यक दृष्टिकोण सँ अति उत्तम होइत अछि।

तखन दुनू  पक्ष एक टा नीक दिन ताकि ओहि दिन कन्या आ वरके सिद्धांतक निर्णय लैत छैथि। एहि प्रक्रिया में वर-कन्या के प्रत्यक्ष  रहबाक कोनो काज नहि होईत अछि। किंतु श्रेष्ठजन आ पंजीकारक उपस्थिति में दुनू पक्ष क लोक कोनो देवस्थान वा आनो सार्वजानिकस्थल पर जमा भऽ कऽ अपन -अपन प्रतिनिधि केँ पारंपरिक परिधान धोती -कुर्ता,पाग -दोपटा सौं सज्ज कऽ अनैत छैथ। मातृपक्ष सौं पाँच आ पितृपक्ष सौं सात पीढ़ी के रक्त संबंध नहि भेला पर पंजीकार विवाह अधिकार दैत छथिन्ह।

भगवती लग धूप-दीप देखा श्रेष्ठ परिजन समाजक पुरूष वर्ग सुवर्णामे आमक पल्लव  संग डाला लय पान-सुपारी मसाला संग निर्धारित स्थल पर विदा होयत छथि। दुनू पक्षक समक्ष पंजीकार  वर-वधूक भाई के लोटा (सुवर्णा)  उठाबय के अधिकार हेबाक सहमति दैत छथि। वर-वधू पक्ष दीस सँ गुलाबपाश सौं इत्र छीटल जाय अछि, जलपान ,शरबत इत्यादि के व्यवहार होईत अछि।

घर घुरला पर लोटा उठैनिहार के पैर औंगारल जायत अछि, भगवती के मिनती होयत अछि। सिद्धांतक गीतक संग स्त्रीगण केँ तेल सिंदूर आ पान-मसाला देल जायत अछि। कन्या केँ पसाहिन होयत छैन्हि आ श्रृंगार कऽ  कऽ गीतनाद होयत अछि। लगन भेलाक  उपरांत कनिया विवाह धरि टिकुली नहि सटैत छथि।

ई तऽ  भेल ओ रीति जे अदौ सौं  चलि अबैत आयल। आब आधुनिकता केँ असर सँ सिद्धांतक दिन 'रिंग सेरेमनी'' क प्रचलन बड्ड देखबा  में अबैत अछि जे अन्य समाजक प्रथा अछि। एहि सौं विवाहमे खर्च मौजमजा में तऽ वृद्धि भेल मुदा अन्य विध जे महत्वपूर्ण छल कनिया क मुँहदिखाई वगैरहक औचित्य पर प्रश्नचिन्ह लगा रहल अछि। आ प्रदर्शनक लालसा में एकटा  महत्वपूर्ण आ सादगी पूर्ण विध आब बजारक हवाले अछि। जखन कि अखनो कर्णकायस्थक महत्वपूर्ण वर्ग में तऽ कैयक बेरि कथा ठीक भेला पर लड़कीवला के मदति के रूप  में दुनू दिसक खर्चा जोड़िकय विवाह करबाक अनेको उदाहरण भेटि जायत। 

लेखिका - कंचन कंठ
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com








Saturday, 17 August 2019

चिट्ठी / कंचन कंठ

तीन पुश्त कें एकसाथ राखी आ संगहि चिट्ठी

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बीतल जमाना कें सबसँ बरका खूबी छल, जे हम सभ किछु-ने-किछु लिखैत छलहुँ; मुँहजबानियो बड्ड  काज होइत छल  मुदा लिखलाहा के बाते अलग! चाहे गीतनाद होऊ कि चिट्ठी पत्री। चिट्ठिये टा नहि, जखन डाकिया कोनो खुशी के चिट्ठी लऽ कऽ अबै तऽ ओहो हितमीत सौं कम नहि बुझाय। जे पढ़ि-लिख नहि सकैत छलीह तिनका लेल तऽ देवता।

खैर, ई पत्र-पुराण हमर कनि अलग अछि। हमरा कोनो पुस्तक अथवा किछो मनोरंजक पढ़य लेल भेटि जाय तऽ हम आ हमर ओ किताब या पत्रिका। व्यवधान नहि होय ताहि लेल कोठाम (छत) सौं लऽ कऽ पलंगक नीचा तक कोनो स्थान हमरा लेल अछोप नहिं । नव मैगजीन के आगमन आ हमर विलुप्ति दुनू एकहि संग होय। आरे बा तऽ कि करितहुँ! एतय तऽ एक अनार, सौं बीमार वला हाल छल। तऽ हमर नम्मर अबैत-अबैत तऽ पुरना जाइत कि ने।

हमहुँ ने, कि कहू एहि ठाम आबि बहकि जाइ छी, मने "जाना था जापान, पहुंच गए चीन" वला हाल भऽ जाइत अछि। कतय छलहुँ हम, हँ तऽ पढ़ैत रहैत छलहुँ तऽ लिखैयो के मौका लगैत छल तऽ कखनो कविता के उत्तर लिखै मे निकलै तऽ कखनो चिट्ठी लिखै मे। तऽ चिट्ठी लिखै छलहुँ दीदी के, भैया के, सखीगण केँ। राखी भेजलहुँ तऽ सदिखन चिट्ठी जरूर लिखै छलहुँ। ओनाहूँ तऽ पहिने यैह एकटा साधन छल। एहि चिट्ठी पर कैकटा कवि, तऽ गीतकार संगीतकारके जीवन बनि गेलैन। कतेको गीत गायल गेल अछि "चिट्ठी जे लिखई ओझा", "पिरिय पराननाथ सादर परनाम" आदि कैकटा गीत, बटगबनी आदि। कतहु बहिन, भाई के कुशल मंगल चाहैय छथि तऽ कतहु ओहि मे माय-बापक आशा औ विश्वास छैन्ह तऽ कतहु विरहिनि के प्रेम-ओ आशंका। कतेक विविधता भरल छल ई चिट्ठी - पत्री के संसार! "पिता के पत्र पुत्री के नाम"- स्वर्गीय प्रधानमंत्री नेहरू लिखित तऽ विश्व-प्रसिद्ध अछि।

खैर, हम जखन सासुर एलहुँ तऽ एकटा विचित्र बात देखलहुँ। हमर सासु माँ के अपन चिट्ठी बेटा सौं लिखबैत। आ ओ जे सब कहैत छलीह ओ  सबटा लिख दैत छलाह, नीक -अधलाह, जे ओ कहैत छलीह। हमरा हँसियो लागल आ छगुन्तो भेल कि अपन बुराई अहाँ अपने किया लिखैत छी। ओ कहलैथ कि ई तऽ माँ ओ मामा सभक गप छैन्ह तऽ हमरा कि जाइत अछि! आखिर ओहो तऽ अपन मोनक गप कतहु करतीह। बाद में ओ हमरा सौं लिखबय लगलीह आ कहि दैत छलीह कि ई - ई सभ लिख दिहैं।

आब तऽ जखन हमरा बेटी भेल तऽ एक संगे तीन पुश्त कें राखी पठाबय परय। ओफ्फ्फ! कत्ते मोश्किल  ने ! गिनकऽ राखी, लिफाफा, टिकट, पता, पिनकोड सहित, बाप रे! एत्ते सभ घरक काजक संग ईहो सभ काज रहै छला। ताहि पर सौं सभमे चिट्ठी लिखनाय। मुदा सब पैघ-छोट के यथोचित पत्र लिखैत रही आ पंद्रह दिन पहिने पोस्ट करैत रही।

जिनका नहि भेटैय तऽ फेर क्लास लगैत छल कि जरूर पता वा पिनकोड में गड़बड़ी केने हेबही। आ जखन भोरेभोर मामाजी सभ राखी बान्हिकय आशीषक फोन करैत छलाह तऽ मेहनत सफल बुझाय। 

आब तऽ ओ सभ सपना आ कि मुरूखते लगतै लोक के कि ई फोन, व्हाट्सएप, स्काइप के जमाना मे चिट्ठी! मुदा न हम कम-स-कम राखी पर चिट्ठी जरूर लिखै छी आ बेटियो सभ पर जोर दै छी। तऽ एहि बेरि जखन सुरभि  चिट्ठी अपन सभसौं छोट पिसियौत भाई के चिट्ठी लिखलक तऽ ओ बच्चा तऽ किताब-काॅपी  जेकरा सौं कनि-कनि परिचय भऽ रहल अछि एखन हुनका ततेक नीक लगलैन्हि  कि ओ नाचि-गाबिकय दिनभरि पढ़ि रहल छथि। तऽ बड़की बहिन श्रेया दीदी झटि दय वीडियो बनाकय पठा देलैथ।  सभ गोटे के स्वतंत्रता-दिवस ओ रक्षा- बंधनक हार्दिक बधाई ओ शुभकामना।
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आलेख - कंचन कंठ
लेखिकाक ईमेल - kanchank1092@gmail.com
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लेखिका - कंचन कंठ

सखी बहिनपा समूहक सदस्यगण

   

Monday, 22 July 2019

'कर्णामृत' पत्रिकाक जनवरी-जून 2019 लघुकथा अंक प्रकाशित

मनोरंजक आ विचारोत्तेजक लघुकथा सँ परिपूर्ण विशेषांक


अहि अंक मे पृष्ठ संख्या 65 पर लेखिका चंदना दत्तक दू टा लघुकथा प्रकाशित भेल अछि. पहिल "औंठा छाप" हास्य छै जहनि कि दोसर "हँ गै दैया हमरो" अत्यंत गम्भीर विषय पर आधारित अछि. अहि मे लेखिका चंदना दत्त देखौलन्हि अछि कि केना पाँच-छौ सालक बच्ची सभ सेहो पुरुषक कामुकतापूर्ण अनुचित दृष्टि कें असहाय रूप सँ सहै लेल विवश छैक. लघुकथा सोचबाक लेल बाध्य करैत अछि. 

पृष्ठ 66 पर कंचन अरबिंद कंठक के दुइ गोट लघुकथा छैक- 'कर्तव्यनिष्ठा' आर 'ग़ठबंधन'.  दूनू लघुकथा असल मे जीवनक संस्मरण छै. पहिल मे प्रधानमंत्री चंद्रशेखरक काल मे एक टा कर्तव्यनिष्ठ पदाधिकारी कें कार्यक उल्लेख छै त दोसर मे पिताजी के विनोदी स्वभावक वर्णन छै. दूनू मनोरंजक शैली मे लिखल छै जै सँ पढ़ैवला के मोन लगै छै आ किछु सिखैले सेहो भेटै छै. 

ई पत्रिका अवश्य कीन कS  पढ़बाक चाही.
(-बेजोड़ इंडिया ब्यूरो)



Thursday, 27 June 2019

चुलबुली ननदिया -प्रेमक इजहार / कंचन कंठ

प्रेमक इजहार

हमर एक टा ननदि छलैथ शैलजा कंठ,ओ जतबे सुंदर ओतबे तेजस्विनी छलीह। स्नातकोत्तर अध्ययन लेल जेएनयु में एडमिशन भेलैन। एतय के त माहौल देखिकय क्षुब्ध रहि गेली । कहां ओ पढ़निहार आ अपन लक्ष्य के लेल कटिबद्ध आ कतय ई खुलापन! खैर,ओ अपन काज सं काज रखैत छलीह, किंतु जे बिहारी छात्र-छात्रा छल, ओकरा सभ के कहियो काल सावधान करैत रहैत छलीह।

ओहने एकटा छात्र छलैथ विकास कुमार। ओ हुनका व्यक्तिगत रुप सं जनैत छलीह ओ मनप्रीत कौर सं जी-जान सं प्रेम में परि गेल छलाह। ओकरा इम्प्रेस करै ले कोनो अवसर चुकै नै छलाह। मनप्रीत सेहो हुनका प्रति आसक्त भय गेलीह। एक दिन सोचल जे किया नै हमहुं किछ करि अपन प्रेम के अभिव्यक्त करै लेल। त ओ शैलजा क समक्ष अपन ई बात रखलैन कि "तुम और विकास तो एक ही बोली बोलते हो, क्या तुम मुझे अपनी भाषा में आई लव यू बोलना सिखा दोगी?" शैलजा झट दs तैयार भ गेलीह आ कहलनि "मैं तो सिखा दूंगी पर तुम तीन-चारि दिन अच्छे से याद करके ही मिलना।"

बड्ड बेस तहिना कय मनप्रीत बड़ मनोयोग से प्रैक्टिस केलैन्ह। एम्हर विकास बाबु परेशान छलाह कि भेटे नै भs रहल अछि। तs जहिना मनप्रीत पांचम दिन समाद देलखिन, बेचारे भागल-भागल गेलाह। हिनका देखतहि मनप्रीत जोर-जोर सं कहै लगलीह "रे कोढ़िफुट्टा, रे बढ़नझट्टा, रे अभगला,रे कुलबोरन, रे कुलघाती एहि दिन लै मां-बाप दीनानाथ के व्रत उपवास केने छल, जे तौ आइ ई सभ काज करै छह! पढ़बें - लिखबें से नहि यैह सभ में लागल रह।" विकास कुमार के त चकचौन्हि लागि गेलैन आ लोक हंसैत हंसैत पगला गेल।
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आलेख - कंचन कंठ
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Thursday, 6 June 2019

8 जून'19 केँ द्वारका (नई दिल्ली) मे मुक्तांगन द्वारा पोथीक समीक्षा आ लोकार्पण / भगजोगनी : कखनो इजोत आ कखनो अन्हार - डॉ. राजीव कुमार वर्मा

संस्था द्वारा सभ लोकनि केँ खुला आमंत्रण छै.




समीक्षक
प्रोफेसर देवशंकर "नवीन"
श्रीमती कुमकुम झा
डॉ. कैलाश कुमार मिश्र

आशीर्वचन : डॉ. शेफालिका वर्मा
8 ज़ून, 2019, सायं काल 4.30 सँ 6.00 बजे धरि
मुक्ताँगन, द्वारका
अपने सब सादर आमंत्रित छी

पता:
MUKTANGAN
At USHA FARMS
Isapur Khera, Dwarka,
New Delhi 110061
Near Metro Station Sector 21 Dwarka
Mobile 9818994440

Muktaangan in association with Maithili-Bhojpuri Academy, New Delhi cordially invites you all for the launch of Bhagjogni by Dr. Rajiv Kumar Verma.

With review panellists - Professor Dev Shankar “Navin”, Kumkum Jha, and Dr. Kailash Kumar Mishra, along with the blessings of Dr. Shefalika Verma.

This Saturday, 8th June 2019, 4:30 pm onwards at Muktaangan, Usha Farms, Bijwasan.


 


Tuesday, 28 May 2019