Friday, 15 November 2019

*युवा-प्रतिभा* पुछथि बौवा की भेलौ रौ / कवि - विजय बाबू

कविता

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कतेक परती बीघा देखलौं
आरिये- आरि अपने देखलौं
गेलौं शहर जे हम पढ़य वास्ते
गिरैत पड़ैत बस बस्ते ढोलौं
नौकरी प्राइवटमे दिन-राति
घसीटति दिनक रौशनी नै पेलौं
गेल दुनियाँ देखते आँखि सँ दूर
आर अहाँ पूछलौं ई की भेलौ रौ?

उन्नति आनक देखि ऊहापोह मन
मँझदार सँ दूर एक राह पकड़लौं
पड़ाएलौं परदेश बेसी पढ़िक़S
सूद ककरो आब कहाँ लेलौं?
अपनत्व कक्का मामा भैया सभ
बिसरलौं आ पुछै छी - की भेलौ रौ?

पखवाड़ा भरि छुट्टीमे सोचि सभ
बिखरलके समेटब जे भेटल नै कियो
चौथाई दाम एसटीडी देर साँझमें
फ्री रहितो केकरो समय कहाँ पेलौं
चौगामा समाज चारि दिवारमें बस
आर बाबू,अहाँ पूछलौं की भेलौ रौ?
...

कवि - विजय बाबू
कविक ईमेल - vijaykumar.scorpio@gmail.com
प्रतिक्रियाक लेल ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com

Monday, 11 November 2019

मैथिली लघु समाचार

1. ग्राम- खड़ौआ, मधुबनी मे कर्णगोष्ठीक महिला मंच' क स्थापना 

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गाम-घरक महिलागण अनेक प्रकारक कलाविद्या मे निपुण होइत छथि। हुनकर विद्या मे निखार आवै आ सामाजिक दायित्वक बोध होइ अहि लेल महिला विशेषक संस्था बड़ सहायक होय छैक।

मधुबनी जिलांतर्गत खड़ौआ गाम में मैथिल कर्णगोष्ठी महिला मंच क स्थाापना  कयल गेल। अहि मे खरोवा के पूर्व मुखिया कल्पना दास के एडमिन बनायल गेलेन्हि। अहि अवसर पर रीता देवी, सुनिता दास, चंदना दत्त , जया रानी, मंजू देवी,नबबली देवी भाग लेलीह। ज्ञात हो जे अही गाम सँ मैथिलीक प्रसिद्ध महाकवि लाल दास निकलल छलाह जे अनेक धार्मिक पुस्तकक रचना कयलन्हि।  ईहो ज्ञात हो जे सुनिता दास जे सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था कर्णगोष्ठी महिला ग्रुप के राष्ट्रीय प्रमुख छथि सेहो पं लाल दासक जयंती पर आयोजित कार्यक्रम मे कोलकाता सँ आयल छलीह।

ई जानकारी जया रानी आओर हुनकर पति सुनील कुमार दास सँ प्राप्त भेल।
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समाचार - बेजोड़ इंडिया ब्यूरो
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com




Sunday, 10 November 2019

देवदूत- एक संसमरण / लेखिका - कंचन कंठ

ओ शीघ्र लेल निर्णय

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मनुख के सामाजिक प्राणी कहल गेल अछि, जे कि शत - प्रतिशत सांच अछि। समाज माने जे ककरो दुख - सुख में संग दै बला व्यक्ति क समूह - कहल जा सकैत छैक। कोनो व्यक्ति धनी वा निर्धन के असगरे गुजारा असंभव अछि। जीवन- यात्रा में  अनेक लोक  भेटैत अछि एक - दोसरा के काज अबैत अछि  किंतु किछु लोक एहेन होइत छथि जिनकर कर्ज लोक उतारय के सोचियो नहि सकत अछि।हमर ई कथा ओहि देवदूत के हमर कृतज्ञता ज्ञापन अछि।

हमर बरकी बेटी के एडमिशन इंजीनियरिंग में मुंबई में भेल छल। तखने संयोगवश हमर पतिदेव के सेहो ट्रांसफर मुंबई भ गेल। हम सभ पहिनो ओतय रहैत छलहुं, एकटा छोटछीन फ्लैट सेहो छल ओतय। त दू- तीन साल एमहर- ओमहर बऊयेला के बाद अपन घर में रहब के पुनः अवसर भेटला सं सभ बड्ड आनन्दित - मुदित रही। घरो मे तावत किछु नव साज-सज्जा करबा लेब, सामान ऐला सं पहिने से सोचलहुं।

निश्चय भेल कि ज्वॉइन केला के बाद दुनु छोटका बच्चा सभके स्कूल ट्रांसफर के बाद मुंबई शिफ्ट करी।ज्वाइनिंग के पंद्रह दिन के भीतर पूना सं सभ समटि कय तखन अगिला महीना शिफ्ट भ जाएब।सैह सोचि पतिदेव ज्वॉइन कय लेल आ हम दुनु बच्चा के अर्द्धवार्षिक परीक्षा के तैयारी कराबय में लागि गेलहुं।एक- दू दिन बाद हिनकर फोन आयल कि अगिला सप्ताह गणपति के छुट्टी रहत आ बच्चा सभ के छुट्टी सेहो अछि त अहां सब आऊ गणपति पूजा सेहो देख लेब आ घरो के बारे में आइडिया द देब। एहिना निश्चय भेल।

17 सितंबर 2012 ओहिना याद अछि हमरा। हम बच्चा सब के स्कूल पठा कय जल्दी - जल्दी काज खतम कय पैकिंग केलहुं। त माय के मोन त बुझले अछि। भेल कि ओह बरकी एते दिन सं होस्टल में अछि आ निज पावैन के दिन में जा रहल छी त कनी खजूर  पिरकिया बना कय नेने चली। त झटपट सब सरंजाम कय खजूर ठोकैत रही त हिनकर फोन आयल। हम पूर्ण आत्मविश्वास सँ हिनका कहलियैन "अहां कनिको चिन्ता जुनि करू हमरा किछु परेशानी नै होयत, हम बच्चा सभ संगे आबि जाएब।"आ हम आब पिरकिया के तरद्दुद में लागि गेलहुं।

किंतु कहबी छैक "मेरे मन कछु और है बिधना के कछु और।" बच्चा सभ आयल, ओकरा सभ के हाथ - मुंह धोया, खायलेल बैसेलहुं कि फोन बाजल। उठेलहुं त ओमहर सं हिनकर मित्र के आवाज छल कि "श्रीमान आई सी यू में छैथ, हुनका हार्ट अटैक ऐलैन्हया ।डाॅक्टर के अनुसार दू घंटा सं बेसी समय नहि अछि। एंजियोप्लास्टी करय परत। जल्दी बाजू की करबाक अछि।" हमरा काटू त खून नै! एखने त केहेन नीक बतियैल रही, कतेक प्लान बनने रही कि जीवन एतेक क्षणभंगुर अछि! आब हम की करू? कतय जाउ?  एहि परदेस मे के अछि हमर! तावते फोन सं फेर आवाज आयल "जल्दी बाजू की करब?"

हम कहुना हिम्मत समटलहुं ,नोर पोछलहुं आ जवाब देल "जे डाॅक्टर के नीक बुझाय,जाहि सौं हिनकर प्राण रक्षा होइन से करू। हम अहां के फुल ऑथॉरिटी दै छी।"ई कहि बच्चा सभ के समझा बुझा,पडोसी के स्थिति बता कय ओतय सं असगरे मुंबई चलि देलहुं। भरि रस्ता सभ देवी देवता के गोहराबैत नोरे- झोरे कहुना बाम्बे हास्पिटल पहुंचलहुं। तावत पतिदेव के सफल एंजियोप्लास्टी भ चुकल छल ओ खतरा सं बाहर किन्तु ऑबजर्वेशन मे छलैथ। हम सभ देवी देवता के हृदय सौं धन्यवाद देलहुं।

दोसर दिन जखन ऑफिस के स्टाफ सभ अयला तं हमरा ओहि इंसान क पता चलल जे हमरा लेल देवदूत बनि ठाढि भेला। ओ छलथि हिनकर सबोर्डिनेट "मि. बाघेला" - जे मात्र चार दिन सं  हिनका संग ऑफिस में कार्यरत छलाह। जखन टी ब्रेक मे तबीयत खराब होमय लगलैन्ह त इसारा सं ई बाघेला जी के बजेलाह त ओ हिनका दु - दु टा एसी चलैत पर घामे- पसीने देखिकय किछु अंदाज लगा लेलैनि। ओ झटपट हिनका लेल एकटा ऑफिशियल लेटर हास्पिटल के नामे तैयार कय बाम्बे हास्पिटल अनबाक निर्णय लेल । ई सबसं नजदीकी हास्पिटल छल।हुनकर ई निर्णय लाइफ सेवियर सिद्ध भेल, हिनकर कंडिशन में। तैं हुनक ई कृत्य ओ उपकार त हम ताउम्र नहि बिसरब। जे भेंट करय आबथि - डाॅक्टर सं ल क मित्र,परिचित - सभ हुनकर त्वरित निर्णय ,कार्य ओ अनुभव के भूरि - भूरि प्रशंसा करथि। हम त अनायास हुनका आगे नतमस्तक छी। ओ आब रिटायर्ड भ अनेकानेक सामाजिक कार्य  में एखनो संलिप्त छथि। ओ अहिना सभ दिन स्वस्थ ओ सानंद रहथु। रक्तदान के लेल हम हुनकहि सौं प्रेरित भेलहुं।  मि. बाघेला अपनेके हम कहियो नहि बिसरब।
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 आलेख:-कंचन कंठ
लेखिकाक ईमेल- kanchank1092@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com

Tuesday, 5 November 2019

पंडित लालदास जयंती-सह-स्मृति पर्व समारोह, खड़ौआ, झंझारपुर मे मनाओल गेल

रमेश्वर चरित रामायण आओर मैथिली मे अन्य अनेक धार्मिक पुस्तक रचना कयलन्हि

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महाकवि पंडित लाल दास जयंती पूर्वनिर्धारित समय पर दिनांक 3/11/2019 केँ लाल दास उच्च विद्यालय खड़ौआ'क प्रांगण मे  मनावोल गेल

मिथिलांगन मे पँडित चूड़ामणि लाल दासजीक जन्म  मधुबनीक खड़ौआ गामक सुप्रसिद्ध परिवार मे फाल्गुण कृष्ण तृतीया रवि सन् 1856ई मे भेल छल। ई लालदास क नामे प्रसिद्ध भेलाह। हिनक पिता बचकन दासजी भक्त, धर्मात्मा छलाहमाता पिता साहित्यिक लोक छलाह। बालक चूड़ामणि दरवज्जे पर मौलवी सँ पढैत छलाह

कालाँतरमे दरभंगाक महाराज, महाराज रमेश्वर सिह भेलाह। हुनके सानिध्य मे हिनका बहुत रास तीर्थ जेबाक आ पुस्तकालयक पोथीक अध्ययन करबाक  अवसर प्राप्त भेलनि। अठारह गोट ग्रंथक रचना कयलनि  जाहिमे
मिथिला भाषा रमेश्वर चरित रामायण, सावित्री सत्यवान नाटक, स्त्री धर्म शिक्षा, हरितालिका व्रत कथा, सोमवारी कथा बहुत प्रसिद्ध अछि

अखनधरि पाँचगोट ग्रँथ अप्रकाशित अछि। महाराज रमेश्वर सिह हिनक ज्ञानसँ प्रभावित छलाह ,हिनका धौत सम्मान प्रदान कयने छलाह आ कायस्थर्षि कहि सम्बोधित करैत छलाह। 

काव्यकलाक सँग सँग लेखन कलामे कविवर केँ वेश विलक्षणता प्राप्त छलनि। तिरहुताक सँग देवनागरी लिपि
लिखबाक विलक्षण पँक्ति आकटगर वर्ण विन्यास क अवलोकन करैत छलाह।

देवचित्रक निर्माण अति सुन्दर कयलनि। कविवरक अँतिम रचना श्रीमद्भगवद्गीताक मैथिली पद्मानुवाद छलैन्ह।

मिथिला क अमर कथाकार, महाकवि लालदास अग्रहण तृतीया रवि, सन 1928, 65 वर्षक अवस्था मे चिरनिद्रा मे विलीन भ गेलाह

पँडित लाल दास +2, उच्च विद्यालय मे दस वर्ष सँ समस्त परिवारगण एवम् ग्रामीण मिलि पँडित लालदास जयँती सह स्मृति समारोह उत्सव मनबैत छथि। स्मारिकाक प्रकाशन होयत अछि। विशिष्ट विद्वान सबसँ हुनक कीर्ति सुनल जायत अछि। कवि गोष्ठी क आयोजन, मेधावी बालक ,बालिका के पँडित लालदास मेधा सम्मान सँ सम्मानित कयल जाए छन्हि।

नृत्य संध्याक आयोजन होयत अछि। हमर कथा सँग्रह# गँगा स्नान'क विमोचन एहि शुभ अवसर पर भेल छल 2012 मे दू वर्ष सँ विशिष्ट अतिथिक रूपमे कार्यक्रम मे सम्मानित एवम् सम्मिलित होयबाक अवसर भेटल अछि। ओहि महामनीषीक वँशवृक्षक पाँचम पीढीमे हम छी ई हमर सौभाग्य।
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आलेख - चंदना दत्त
लेखिका का ईमेल - duttchandana01@gmail.com
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Wednesday, 30 October 2019

परदेसमे पावनि / कंचन कंठ

जखनि छठ पूजाक मेलामे गुम गेल बुचिया

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"छठि पावनि लगचियाएल अछि, टिकस के इंतजाम करियौने! गाम नै जेबै, माईं रस्ता देखैत हेथिन्ह कि बऊआ कनिया बच्चा सभ ल क अबैत हैत!" - कहैत प्रश्नवाचक दृष्टिसं अनीता अपन घरवला सुरेशक दिस तकलैन्हि। "नै ये एहि बेरि कहां टिकसक इंतजाम भेल, जे जायब;ओहो चारि -चारि गोटे! एहि सीजनमे मुंबईमे भगवान भेटब सरल; कंफर्म टिकस भेटब मोसकिल!" सुरेश बड्ड दिन भेलै गामसं नौकरीक तलासमे मुंबई अयलाह आ एतहि एकटा प्राइवेट फर्ममे काज करैत छलाह।

"हे भगवान, आब की करब हौ दैब; बच्चा सभ त आस लगौने छल कि छठमे गाम जायब, माईं - बाबासंग खूब मौज करब, कनी नानियो गाम जायब सभ मौसी-मामा सभसंग मेला घुमब"- कहैत-कहैत आंखि नोरा गेलैन्ह अनीताके। 

"यै, ऐना कानैय छी किया, हमरो त इच्छा छल कि पाबनि-तिहार गामे पर मनाबि मुदा अपन कोन सक्क! कोनो सरकार हो, कोनो रेलमंत्री; हमर सभक समस्या जस के तस! कोनो बदलाव नहीं, कोनो सुनवाहि नै। नै अपन घरमे कोनो काज अछि, आ ने परदेसमे कियो दर्द बुझय बला"-बजैत-बजैत सुरेशो कननमुंह भ गेलाह।

"मायके फोन करैत त करेज फाटि रहल अछि मुदा कहि दै छियै जे अहिबेर छठिमे एतहि रहब।" -ई कहि ओ फोन करय चलि गेलाह।दिलके कहुना सम्हारि कय पाबैनक ओरियानमे सभ लागि गेलाह।ओतेक उछाह कतयसं आबय मुदा पाबैनक दिन त घर एहिना नहि छोड़ल जा सकैछ।

छठिक संझुका अरघ, मोन छटपटाय लागल अनीता के,"ओह; की सोचैत हेती सासु कि पुतोहुके बंबईके हावा लागि गेलैन्ह, तें नै अपने एलीह आ नै बेटाके आबय देलखिन्ह! हमर व्यथा के बूझत!" सुरेश जखन बड्ड मनहुस देखलखिन्ह त कहलखिन्ह ; "चलु सब गोटेके जुहू बीच ल चलै छी, हाथ उठतै; त गोर लागि लेब आओर बच्चा सभके  मेलो घुमा देबय त मोन बहटैरय जेतै‌।"

ओ सभ छठि देखय चललाह। रोड पर बड्ड भीड़, कियो कोनिया -दौरा सभ माथे पर उठेने दौड़ल जा रहल छल, जाहिमे विभिन्न समान छलै अरघ पर दै बला‌। त हुनक मराठी ऑटोचालक बाजल,"पता नहि, कौन सा परब है बिहारियों का कि मूली, बैंगन सभ चढ़ाते हैं।" "हौ तों कि बुझब' एहि पाबनिक महातम!"- ओ मोनेमोन बजलाह। बीच पर त लोकक अंते नहि !बुझि परय छल जे समुद्रसं होड़ लागल छै कि के कतेक पैघ! चारू गोटे एकदोसरा के हाथ पकड़ि घुमैत चलल जाइत छलाह। जान पहचान त कियो नहि ,त कतहु ठाढ़ि भ भरल आंखिसौं क्षमा मंगैत गोरि लागि, मां-बाबूक ध्यान करैत आगू बढ़लाह। चलैत-चलैत जखन डेढ़-दू किलोमीटर भ गेल त सोचलाह कि कनि बैसिकय बच्चा सभके "भेल कि पावभाजी" किछु खुआ दैत छी, ओहो सभ प्रसन्न भ जायत।जहां कि पाछां मुड़लाह; त ..... हाय रे दैव! ई कोन कनकिरबी संग लागि गेल! आब कोन उपाय करब? केकर बच्चा अछि, कोना कय की होयत?"

ओहि बचियासं पुछय चाहलैथ त ओ भोकारि पारि कय कानय लागल। ओ दू -तीन सालक जान कतैक जानकारी राखथि कि बुझिते छलैह जे बतबितैन्ह! तखन खायब-पियबके त बाते हवा भ गेल; आब त ओहि बच्चाक मां-बाप लग पहुंचाबय जरुरी बुझना गेल। खैर, सोचलैन्ह जे जाहि रस्ता सं एलहु, ओहि रस्तासं वापस जाय, त कहिं ओकर माता पिता भेटा जाइ!ई सोचैत ओ सभ उनटे पैर आपस चललाह। ओना त बच्चा सभ थाकियो गेल छल मुदा बच्चा के बिछड़ल देखिकय, अपन भूख-थाकब बिसरि बिना कोनो हल्ला-गुल्ला के माता - पिताक संगे चलल जा रहल छलथि। 

अनीता के त होसे गुम भ गेल छल। ओ त बुझबे नहि केलैथ कि कखन ओ बुचिया आंचरक कोर धय एतेक दूर चलि आयल। मोनेमोन राणामाई के ओहि बच्चाकेँ माय-बापसं मिलबै के गोहारि लगा रहल छलीह। एहिना कतेक दूर चलला पर "मम्मी" कहि ओ बुच्ची चिहुंकल! ई सभ ओहि दंपतिक लग गेला त दुनू वैकतिमे खूब घमासान मचल छलैन्ह। घरबला कनियां पर बड्ड खिसियाएल आ कननमुंह भेल कनिया सफाई द रहल छलीह कि हम अरघ दैत रही आ ओ कखन हमर लगसं निकसि गेल नहि बुझलहुं। बेरि-बेरि राणामाई के गोहार लगबैत,सूप , कोनिया, नारियल गछैत जा रहल छलीह कि ई सभ बुच्ची के ल क जुमि गेलैथ।

अपन बेटी के सही-सलामत देखिते दूनू परानी भाव - विभोर भ गेलाह आ जोर जोर से कानय लगलाह कि "हमर सभक कोनो अरजल पुण्य छल वा कि छठी मैया के असिरवाद कि जहिना बुचिया हेरायल, तहिना भेटियो गेल।आजुक जुगमे अहां सभ सन सेहो ऐहेन भलमानुष सभ छथि नहि त हम सभ त आसे छोड़ि देने रही कि आब जिनगीमे कहियो एकरा देखब। आ ऐना सही सलामत भेटनाय, एहि मानव समुद्रमे त अकल्पनीय अछि! कहू जे अहां सभ त भगवाने भय प्रकट भेलहुं हमरा सभ लेल।" ह्यूमन ट्रैफिकिंग आ चाइल्ड एब्यूज के एहि जमानामे त ई बात आठमे अजूबा लागल हुनका सभके।

"हे, हे ऐना नहि हैत; चलू - चलू एतय अपन खेमा लगौने छी, रात्रि हमरेसभसंग बिताऊ, भोरुका अरघक बाद परसाद पाबिये कय जायब। ऐतेक उपकार केलहुं अहां सभ आबत जिनगी भरिके संबंध जुरि गेल, हम ऐना जान नहि छोड़ब। देखियौ एहिबेर गाम नहि जा सकलहुं टिकटक अभाव में त एतही पूजा केलहुं, हमर मां-पिताजी सेहो छथि, हुनके ठाम पर पहुचेबामे ई बुच्ची कोना ससरि गेल से बुझबे नहि कैल!"-ई अहि ओ हुनका सबके घीचने-घीचने अपन टेंटमे ल गेलाह आ सभसौं भेंटि करैलैथ आ सभ घटना बताबय लगलाह।

अनीता आ सुरेश के त बुझेलेन्हि जेना "घर सौं दूर एकटा आर घर" भेटि गेल, बच्चा सभकेँ त खुसीके ठेकाने नहि! ओ सभ त संगी-तुरिया संगे बाबा, दादी सभ पाबि गेलाह। भोरका अरघ संगे देलन्हि सभ गोटे। फेरतय परसाद आ सिनेहक अटूट बंधन खोंईछमे ल क अपन घर बिदा भ जाई गेलाह। एहिबेरुका छठि सभलेल अविस्मरणीय भ गेल। 
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लेखिका - कंचन कंठ
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Thursday, 24 October 2019

धनतेरस दिन कंगना / कवि - विजय कुमार

कविता 

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अछि आई दिन धन्वन्तरिक
शुभ-मंगलक दिन धनतेरस
अछि दीपोपंच पर्वक आरंभ
धातु, मेवाक बाजार सजल।

अछि सुन्नर मन भोरे-भिनुसरे
सुन्नर उमंगक दिन धनतेरस
छथि सजना, संगहि घूमि हम
चारू दिस जगमग चमकत

देखि सब हम की की कीनब
भरि दिन लक्ष्मीक धनतेरस
उच्छल तरंग में अछि अंगना
पाबी हम एक सुन्नर गहना।

अछि आजूक दिन हर्ष दुगुना
साफ सुन्नर दिन जे धनतेरस
भेटल खन खनखनाइत कंगना
रौशन जग रहै अखंड अहिना

अछि नै कंगना मात्र ई हमर
भेंट लक्ष्मीक दिन धनतेरस
पंख मोरक सन हर्षित हम
सजल जिनगी भरि ई कंगना।

अछि अंतर्मन सँ सजल मोन
आबै अनगिनत दिन धनतेरस
जीवनक गोलचक्र -साल, महीना
घूमय संगहि खनखन कंगना
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कवि - विजय बाबू
कविक ईमेल - vijaykumar.scorpito@gmail.com
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Wednesday, 23 October 2019

गवहा सँक्राति - मिथिलाक पर्व

कुमारि कन्या सँ चिपडी पथेबाक उद्देश्य

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कार्तिक मास उत्तम मास अछि
एहिमे भरिमास आँवला क गाछतर साँझ देखाओल जाईत अछि
अक्षय नवमीक धातृगाछ तर भोजन बनाकय खायल जाईछ
धातृ के सेवनसँ रोगव्याधि नहि होईत अछि।

मिथिला क पावन भूमि पर अनेक पर्व पर्यावरण सँ जुडल अछि। ताहिमे एक अछि गवहा सँक्राति कार्तिक मासक तुला राशिक सँक्राति क मनाओल जाइछ। भोरमे कुमारि कन्या अरिपन ध गायक गोबरसँ चिपडी पथैत छथि ओहिमे सिन्दूर  पिठार लगाय कुम्हरक फूल साटल जाइछ। एहि चिफडीसँ नवान्न दिन गोसाऊनि घर मेअग्नि स्थापन कयल जाइछ आ लक्ष्मी पूजा दिनका सँठी लागाक साँझधरि राखलजाइत अछि ओहि अग्निसँ साँझखन दीप जरायल जाइछ। कुमारि कन्या सँ चिपडी पथेबाक ई उद्देश्य जे जँआगू गृहस्थाश्रम मे ओकरा जारनिक अभावमे चिपडियो पाथय पय, बच्चा क मलमूत्र उठाबय पडै, अपनासँ श्रेष्ठ केँ सेवा करय पडय त कष्ट नहि होय। साँझखन चिन वारसँ ल क आँगन धरि अरिपन पाडल जाइछ।     
                   

ओतय ककबाक अरिपन पडैछ जाहि परपीढी पर सिन्दूर पिठार लागल तामा राखल रहैछ। तामामे धान पान दूबि सुपारी राखल रहैत अछि।
तीन बेर धन धन लक्ष्मी घर जाऊ
दारिद्र्य बहार जाऊ
कहल जाईत अछि
भगवतीक अरिपन सूर्योदय सँ पूर्व मेटा देल जाइछ।

सँगहि ई धारणा अछि जे भगवती गवहा सँक्राति क चास घूमय जाय छथिन्ह आ किसान हुनका सँ प्रार्थना करय छथि जे -
हे लछमिनिया सेर बराबरि
यानी  सब धानक शीश खूब भरल पूरल रहय जाहिसँ सबके घर भरि जाय
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आलेख - चंदना दत्त
लेखिकाक पता - ग्राम- रांटी, मधुबनी (बिहार)
लेखक का ईमेल - duttchandana01@gmail.com
प्रतिक्रिया ह्तु ईमेल - editorbejodindia@yahooo.com




चंदना दत्त

नमस्कार सब सुधीजन केँ
सूचित करैत हर्ष अछि जे कर्णकुम्भ मे 
अपन गुणक प्रदर्शन करबाक लेल स्टालबुकिंग भ रहल अछि
1बिमला दत्त स्वयं सहायता समूह राँटी
२लोककलाकृति नूतन बाला ,मधुबनी
मिथिला पेन्टिंग 
3 मधुबनी क्राफ्ट्स, लोकहित रँगपीठ सँस्थान ,मधुबनी
4 मिथिला चित्रकला शशिदत्त ,दरभंगा
5मिथिला चित्रकला रुबी कर्ण, दरभंगा
6 रचना सिक्की आर्ट्स, धीरेन्द्र कुमार
7  ज्ञानेंद्र भास्कर
8सुरेश कुमार लाभ 
अल्काइन वाटर आयोनाईजर

आऊ सबगोटे मिलि मिथिला क शान बढाबी
मेहदी,अचार,बडी अदौरी,ठकुआ पिडिकिया ,एप्लीक ,सिलाई आदिक स्टाल बुक कराऊ
कर्णकुम्भ मे डुबकी लगा बहिन भाय 
भेट करय जाऊ
कर्ण विभूतिक सम्मान करय जाऊ
चँदना दत्त