Wednesday, 23 October 2019

गवहा सँक्राति - मिथिलाक पर्व

कुमारि कन्या सँ चिपडी पथेबाक उद्देश्य

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कार्तिक मास उत्तम मास अछि
एहिमे भरिमास आँवला क गाछतर साँझ देखाओल जाईत अछि
अक्षय नवमीक धातृगाछ तर भोजन बनाकय खायल जाईछ
धातृ के सेवनसँ रोगव्याधि नहि होईत अछि।

मिथिला क पावन भूमि पर अनेक पर्व पर्यावरण सँ जुडल अछि। ताहिमे एक अछि गवहा सँक्राति कार्तिक मासक तुला राशिक सँक्राति क मनाओल जाइछ। भोरमे कुमारि कन्या अरिपन ध गायक गोबरसँ चिपडी पथैत छथि ओहिमे सिन्दूर  पिठार लगाय कुम्हरक फूल साटल जाइछ। एहि चिफडीसँ नवान्न दिन गोसाऊनि घर मेअग्नि स्थापन कयल जाइछ आ लक्ष्मी पूजा दिनका सँठी लागाक साँझधरि राखलजाइत अछि ओहि अग्निसँ साँझखन दीप जरायल जाइछ। कुमारि कन्या सँ चिपडी पथेबाक ई उद्देश्य जे जँआगू गृहस्थाश्रम मे ओकरा जारनिक अभावमे चिपडियो पाथय पय, बच्चा क मलमूत्र उठाबय पडै, अपनासँ श्रेष्ठ केँ सेवा करय पडय त कष्ट नहि होय। साँझखन चिन वारसँ ल क आँगन धरि अरिपन पाडल जाइछ।     
                   

ओतय ककबाक अरिपन पडैछ जाहि परपीढी पर सिन्दूर पिठार लागल तामा राखल रहैछ। तामामे धान पान दूबि सुपारी राखल रहैत अछि।
तीन बेर धन धन लक्ष्मी घर जाऊ
दारिद्र्य बहार जाऊ
कहल जाईत अछि
भगवतीक अरिपन सूर्योदय सँ पूर्व मेटा देल जाइछ।

सँगहि ई धारणा अछि जे भगवती गवहा सँक्राति क चास घूमय जाय छथिन्ह आ किसान हुनका सँ प्रार्थना करय छथि जे -
हे लछमिनिया सेर बराबरि
यानी  सब धानक शीश खूब भरल पूरल रहय जाहिसँ सबके घर भरि जाय
....

आलेख - चंदना दत्त
लेखिकाक पता - ग्राम- रांटी, मधुबनी (बिहार)
लेखक का ईमेल - duttchandana01@gmail.com
प्रतिक्रिया ह्तु ईमेल - editorbejodindia@yahooo.com




चंदना दत्त

नमस्कार सब सुधीजन केँ
सूचित करैत हर्ष अछि जे कर्णकुम्भ मे 
अपन गुणक प्रदर्शन करबाक लेल स्टालबुकिंग भ रहल अछि
1बिमला दत्त स्वयं सहायता समूह राँटी
२लोककलाकृति नूतन बाला ,मधुबनी
मिथिला पेन्टिंग 
3 मधुबनी क्राफ्ट्स, लोकहित रँगपीठ सँस्थान ,मधुबनी
4 मिथिला चित्रकला शशिदत्त ,दरभंगा
5मिथिला चित्रकला रुबी कर्ण, दरभंगा
6 रचना सिक्की आर्ट्स, धीरेन्द्र कुमार
7  ज्ञानेंद्र भास्कर
8सुरेश कुमार लाभ 
अल्काइन वाटर आयोनाईजर

आऊ सबगोटे मिलि मिथिला क शान बढाबी
मेहदी,अचार,बडी अदौरी,ठकुआ पिडिकिया ,एप्लीक ,सिलाई आदिक स्टाल बुक कराऊ
कर्णकुम्भ मे डुबकी लगा बहिन भाय 
भेट करय जाऊ
कर्ण विभूतिक सम्मान करय जाऊ
चँदना दत्त



मनुवा नीक तs सब नीक /कवि - विजय कुमार

कविता
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मोन पड़ैये घर माईटक भीत केँ
चार सँ टप टप आ साय साय,
ख़ुशी आ गम सभक एक्कहि
मनुवा उमंगभरि दिन आ राईत ॥

मोन रे, दिन दूना राति चौगुना
बचपन सँ अक्खन धरि सुनि
सुनि बस यैह जाधरि ज़िनगी
सुनि ताधरि आ करि उन्नति ।

मोन कहैया विश्व में चमकैत
सुनी भारतवर्षक उच्छल तरंग,
सूनी दिलकेँ, झांक तू धरा पर
मनुवा शीर्ष पर घूमैत घूमैत

मोन रे, कहै ज़िंदगी रही सुखी
सुखी रहि सकी सभ संग संग
सुखी रहै घाटी-हिम, गंगा, जमुना
मोनक भ्रममे रहय नै कोई सुखी ।

मोन होइये कोना पाबी सुखी
सुख पाबी मान सम्मान देखि
सुखी-संसार चलै चारू दिस
मनुवा सुन्नर चलै देखैत देखैत
....
कवि - विजय बाबू
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Sunday, 13 October 2019

बेगलुरू (कर्नाटक) मे विद्यापति पर्व समारोह 19.1.2020 केँ होयत

कर्नाटक मिथिला सांस्कृति परिषद द्वारा तिथि मे परिवर्तन कय 19 जनवरी कयल गेल

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बेंगलुरु. 13.10.2019 / कर्नाटक मिथिला सांस्कृतिक परिषद के कोर कमिटी के मीटिंग आइ बिहार भवन में सम्पन्न भेल। मीटिंग में आगामी होब वला विद्यापति पर्व समारोह के बारे में विस्तृत विचार विमर्श भेल। मीटिंग में भेल किछ महत्वपूर्ण निर्णय के विवरण नीचा द रहल छी।

1.जेना कि पहिले स विद्यापति पर्व समारोहक तिथि 12 जनवरी तय भेल रहै मुदा 12 जनवरी क पैलेस ग्राउंड के अनुपलब्धता के चलते ई निर्णय लेल गेल कि कार्यक्रम के एक सप्ताह केँ लेल आगू बढ़ाएल जाए। सभ गोटे सर्वसम्मति सँ 19 जनवरी 2020 पर अपन सहमति देलेन्हि।

2. कार्यकारी समिति के महासचिव पद के लेल  श्री आर के सिंह के नाम के प्रस्ताव भेल आ सभ गोटे सर्वसम्मति सँ अहि प्रस्ताव के पारित कयलन्हि। हाँ सभकेँ जनतब हैत कि किछु दिन स इ पद खाली छल। महासचिव के अलावा किछु फाउंडर मेंबर सब सेहो संस्था स जुड़लाह। जूड़ वला नव फाउंडर मेंबर्स  में श्री अजय कर्ण , श्री बीरेंद्र झा, श्री आशीष मिश्रा, पालन झा, श्री कुंवर जी आ श्री विजय  कुमार जी  शामिल छैथ। नब निर्वाचित महासचिव आ सब नब फाउंडर मेंबर्स  के बहुत बहुत शुभकामना।

3.मीटिंग में जयमहल पैलेस में  22 तारीख'क भेल पिछला कार्यक्रम के आय-व्ययक ब्योरा गोविंद द्वारा प्रस्तुत कएल गेल। 

4. कर्नाटक मिथिला सांस्कृतिक परिषद  के वेबसाइट के रूपरेखा पर सेहो चर्चा भेल आ श्री अजय कर्ण जी वेबसाइट निर्माण के जिम्मेदारी स्वीकार केलैन। अजय  के अहि लेल बहुत बहुत साधुवाद। वेबसाइट निर्माण मे  गिरीश, दीपक  आ विजय, अजय के सहयोग करताह। सब गोटा के अहि वास्ते बहुत बहुत धन्यवाद।

4. वेबसाइट निर्माण कें बाद वेबसाइट के थ्रू हर महीना 2 टा विद्यार्थी के चुनाव कर के आ हुनका सबके 1 हजार पारितोषिक अपना दिस स देब के प्रस्ताव ग्रुप के सदस्य विनोद चौधरी जी रखलाह। अहि पर विस्तृत चर्चा  वेबसाइट निर्माणक बाद होयत।

5. आगामी विद्यापति समारोह के लेल ग्रुप के मुख्य संयोजक प्रजेश झा द्वारा बनावल गेल किछु महत्वपूर्ण कमिटी में जुड़S वास्ते किछु नव लोक अपन अभिरूचि आ सहमति देलैन। ऊ सूची प्रजेश जी के प्रेषित क देल जेतेन्हि।

6. विद्यापति पर्व समारोह में होब वला खर्च आ फण्ड जेनेरेट कर के वास्ते सेहो गहन चर्चा भेल आ ओहि में स्पॉन्सरशिप के अलावा टिकटक विभिन्न कैटेगरी के बारे में सेहो प्रस्ताव राखल गेल जाहि पर अंतिम निर्णय अगिला मीटिंग में लेल जायत।
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सूचना स्रोत - विजय कुमार
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Tuesday, 8 October 2019

फेर खूब भेलौ जे रावण दहन / कवि - विजय कुमार

                                          दशहरा पर कविता

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अयोध्या नगरी देखि तू
ठानिकS घमंडमे चूर-चूर
रामजीके सौम्यभाव संग
लड़िकS तू भेलएँ चूर-चूर ।

निड्डर छलएँ सेहो मुदा
अहंकारी रहएँ की कम तू ?
लंका संग दशानन मुख
जरलौ खूब जो रे रावण ॥

रामजीक संग बानर सेना
आ तरकश सँ तीर निशाना
समुद्रपार दूर तोहर लंका
रामसेतु सँ दूर नै रहलौ,रावण ।

सीताजीक वृक्षक तलमे
चाल छलौ तोहर अलबेला
तत्पर हरदम हनुमान तहिना
छलमन जरलौ जो रे रावण ॥

लक्ष्मण संग सेहो सदिखन
बूटीक लेल पर्वत हाथेपर,
आनिलथि जे हनुमान सेना
सब देखलएँ तू रे लंकापति ।

गुरु विश्वामित्र शिष्य देखि
गुरूर तोहर खूब जे टुटलौ,
राम-लक्ष्मण के रीति देखि
जरूर जर तू जो रे रावण ॥

रावण जर तू फेर एक बेर
असुर मोन पड़बएँ जखने तू
जगमे सुखी सब देर-सेवर
कहि हम सब जो रे रावण ।

विजयादशमीक रामलीलामे
फेर खूब भेलौ जे रावण दहन
अदृश्य रावण जँ मरय संगहि
नव सूरज सँ मरि जो रे रावण ॥
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कवि - विजय बाबू
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Tuesday, 1 October 2019

हे माँ जगत जननी दुर्गे देवी / कवि - विजय बाबू

जय माँ भगवती

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मिथिला चित्रकला - बिमला दत्त

हे माँ जगत जननी दुर्गे देवी
अहाँक शक्तिमे हमर भक्ति
अहाँकक असीम कृपा सँ रहै सृष्टि
अहाँकक अनुकंपा सँ करि अनुभूति
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि।

हे सप्तश्लोकी नवरात्र विराजे मैया
अहाँक़ रूप अनेक, श्रद्धा हमर एक
अहाँक सोझा देवता सिर झुकावथि
अहाँक सम्मानमे अप्सरागण नाचथि गावथि
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि।

हे माँ नौ नाउसँ प्रसिद्ध जगदंबिके
अहाँक बत्तीस रूपमे रचल संसार पूर्ण
अहाँक विशाल ललाटमे पसरल रौद्ररूप
अहाँक चरणतल जे झुकल सभ असुरदल
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि ।

हे सृष्टिके पालनहारी दुर्गा माँ
अहाँक पृथक रूप आ त्रिशूलक धार
अहाँक हँ उच्चाटन तीनू लोकक पार
करी हम अहाँक मान, रखने छी बस यैह अरमान
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि।

हे जग दुःखहारिणी दुर्गा मैया
अहाँक आराधना करी नित्य हम
अहाँक पूजा करी बिनु विधि बूझने हम
हम बालक के त्रुटि क्षमा करियौ माँ
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि।
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कवि - विजय बाबु
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Thursday, 26 September 2019

समय-चक्र आ फिकिरक दुहूकमे / कवि - विजय कुमार

समय-चक्र आ फिकिरक दुहूकमे

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समय अहाँ आबै छी समय सँ 
मुदा समय सँ चलियो जाई छी
समय अहाँक शिकारमे हम, आ
ब्योंत में सदिखन अहाँ रहै छी।

अहाँक सोझा आबि बूझि नै
जानी नहि हम की की पबै छी?
कतेक कुंठा सेहो गड़ल अछि
बीत सँ अहाँ दहाड़ि रहल छी

समय अहाँक अकल्पनीय परिधिमे
सब संगहि चलय, प्रयासमे छी
अहाँक राह बिनु रोड़ा, हमरा सँ जुदा
संगहि लेल झटकारि रहल छी।

मोनक कोन में दर्द एक शूल सन
हँसि दैत छी तैयो बसंतक फूल सन
काल-कालक मध्यक अंतरालमे
उमंग स्वाधीनता सँ पाबि रहल छी

समय अहाँक़ अद्वीतिय चालमे
हम बालक उम्मीद केँ सटने रहै छी 
देखू, अहि चालमे कोनो चाल चलू नै
हम शिष्ट बनि संग चलि रहल छी।
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कवि - विजय बाबू
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Wednesday, 11 September 2019

युवा प्रतिभा - विजय बाबु / शुभ भिनसर आ गुरु

श्री विजय बाबु मैथिलीमे कविता लिखबाक प्रयास कयलन्हि अछि. हिनकर मैथिलीक प्रति अनुराग केँ प्रोत्साहन देबा लेल हुनकर दू टा कविता प्रस्तुत अछि- 

 शुभ भिनसर

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अगणित अनुपम स्वागत भोरे भोरे
जीवनक चक्र चलय भोरे अनहारे
परमात्मक असीम कृपा बरसय
मनमस्त सूरजक लाली सँ प्रभात ।

मात-पिताक केर आशीर्वाद पाबि
संगहि पैघक आ गुरुक आशीर्वाद
भारतवर्ष केँ हजार सालक परम्परा
स्नान-ध्यान संग करि सूर्य नमस्कार 

छल जे दीवालीक प्रातः केँ सुप्रभात
जन्म भेल हमर जगमग रात्रि उपरांत
हरियाली बगिया में फ़ूल जे खीलल
उमंग पटना सन शहर संग गामे गाम ।

बसलौं संजुक्त परिवार संग भोरे भोरे
देखलौं गरीब गामक भिन्सर द्वारे-द्वार
रहलौं महरूम अपने परिवार के देखि
देखि शहर के भिनसर बस अपने द्वार 

बेफिक्र घूमलौं माइटे-माइट नै चप्पल
खेतक आड़ि दिस टोली भोरे-भिनसरे
दर्शन आड़ि के बदला जे सड़कक लेन
देखू कतय छी पेट खातिर भोरे भोरे ।

कखनो भेल भिनसर सँ पहिले भोर आ
कखनो भेल सूरजक किरनक उपरांत
सभ भिनसर केँ दर्पण में नित अर्पण
करि हम शुरू प्रसन्न मन अप्पन काम 
...

गुरु 

माता-पिता संग विद्यमान छथि गुरु
पल-२ डगर-२ उपस्थित छथि गुरू
मनुष्यता के लेप सँ ढाँचा बनबैत
सदैव अक्षुण्ण छथि जे हमर, ओ गुरू ।

पोथी हाथमे मुदा शब्द जुबान पर
शिक्षा के डिग्री सँ दूर हुनर जोर पर
उमंग मास्साबक, तरंग कम ने शिष्यक
छलाह एक सौं एक बढिकS ओ गुरू 

जीवनक सफरमे साम्य केँ भावमे
उत्कृष्ट सदभाव,  प्रेमक परिसीमामे,
चटकन सँ सटकन केँ मधुर यादिमे,
शब्द-२ रहत समेटल मनमे यौ गुरु ।

तेल-पानि मिलन नै, घड़ा चाहे भरल
गुरु-शिष्यक मिलान नै, बस शीश झुकल,
रहब नतमस्तक चाहे जहाँमे जतय रहब
कोटि-२ नमन छथि अटल हमर ओ गुरु 
...

कवि - विजय बाबू
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