Wednesday, 23 October 2019

मनुवा नीक तs सब नीक /कवि - विजय कुमार

कविता
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मोन पड़ैये घर माईटक भीत केँ
चार सँ टप टप आ साय साय,
ख़ुशी आ गम सभक एक्कहि
मनुवा उमंगभरि दिन आ राईत ॥

मोन रे, दिन दूना राति चौगुना
बचपन सँ अक्खन धरि सुनि
सुनि बस यैह जाधरि ज़िनगी
सुनि ताधरि आ करि उन्नति ।

मोन कहैया विश्व में चमकैत
सुनी भारतवर्षक उच्छल तरंग,
सूनी दिलकेँ, झांक तू धरा पर
मनुवा शीर्ष पर घूमैत घूमैत

मोन रे, कहै ज़िंदगी रही सुखी
सुखी रहि सकी सभ संग संग
सुखी रहै घाटी-हिम, गंगा, जमुना
मोनक भ्रममे रहय नै कोई सुखी ।

मोन होइये कोना पाबी सुखी
सुख पाबी मान सम्मान देखि
सुखी-संसार चलै चारू दिस
मनुवा सुन्नर चलै देखैत देखैत
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कवि - विजय बाबू
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Sunday, 13 October 2019

बेगलुरू (कर्नाटक) मे विद्यापति पर्व समारोह 19.1.2020 केँ होयत

कर्नाटक मिथिला सांस्कृति परिषद द्वारा तिथि मे परिवर्तन कय 19 जनवरी कयल गेल

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बेंगलुरु. 13.10.2019 / कर्नाटक मिथिला सांस्कृतिक परिषद के कोर कमिटी के मीटिंग आइ बिहार भवन में सम्पन्न भेल। मीटिंग में आगामी होब वला विद्यापति पर्व समारोह के बारे में विस्तृत विचार विमर्श भेल। मीटिंग में भेल किछ महत्वपूर्ण निर्णय के विवरण नीचा द रहल छी।

1.जेना कि पहिले स विद्यापति पर्व समारोहक तिथि 12 जनवरी तय भेल रहै मुदा 12 जनवरी क पैलेस ग्राउंड के अनुपलब्धता के चलते ई निर्णय लेल गेल कि कार्यक्रम के एक सप्ताह केँ लेल आगू बढ़ाएल जाए। सभ गोटे सर्वसम्मति सँ 19 जनवरी 2020 पर अपन सहमति देलेन्हि।

2. कार्यकारी समिति के महासचिव पद के लेल  श्री आर के सिंह के नाम के प्रस्ताव भेल आ सभ गोटे सर्वसम्मति सँ अहि प्रस्ताव के पारित कयलन्हि। हाँ सभकेँ जनतब हैत कि किछु दिन स इ पद खाली छल। महासचिव के अलावा किछु फाउंडर मेंबर सब सेहो संस्था स जुड़लाह। जूड़ वला नव फाउंडर मेंबर्स  में श्री अजय कर्ण , श्री बीरेंद्र झा, श्री आशीष मिश्रा, पालन झा, श्री कुंवर जी आ श्री विजय  कुमार जी  शामिल छैथ। नब निर्वाचित महासचिव आ सब नब फाउंडर मेंबर्स  के बहुत बहुत शुभकामना।

3.मीटिंग में जयमहल पैलेस में  22 तारीख'क भेल पिछला कार्यक्रम के आय-व्ययक ब्योरा गोविंद द्वारा प्रस्तुत कएल गेल। 

4. कर्नाटक मिथिला सांस्कृतिक परिषद  के वेबसाइट के रूपरेखा पर सेहो चर्चा भेल आ श्री अजय कर्ण जी वेबसाइट निर्माण के जिम्मेदारी स्वीकार केलैन। अजय  के अहि लेल बहुत बहुत साधुवाद। वेबसाइट निर्माण मे  गिरीश, दीपक  आ विजय, अजय के सहयोग करताह। सब गोटा के अहि वास्ते बहुत बहुत धन्यवाद।

4. वेबसाइट निर्माण कें बाद वेबसाइट के थ्रू हर महीना 2 टा विद्यार्थी के चुनाव कर के आ हुनका सबके 1 हजार पारितोषिक अपना दिस स देब के प्रस्ताव ग्रुप के सदस्य विनोद चौधरी जी रखलाह। अहि पर विस्तृत चर्चा  वेबसाइट निर्माणक बाद होयत।

5. आगामी विद्यापति समारोह के लेल ग्रुप के मुख्य संयोजक प्रजेश झा द्वारा बनावल गेल किछु महत्वपूर्ण कमिटी में जुड़S वास्ते किछु नव लोक अपन अभिरूचि आ सहमति देलैन। ऊ सूची प्रजेश जी के प्रेषित क देल जेतेन्हि।

6. विद्यापति पर्व समारोह में होब वला खर्च आ फण्ड जेनेरेट कर के वास्ते सेहो गहन चर्चा भेल आ ओहि में स्पॉन्सरशिप के अलावा टिकटक विभिन्न कैटेगरी के बारे में सेहो प्रस्ताव राखल गेल जाहि पर अंतिम निर्णय अगिला मीटिंग में लेल जायत।
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सूचना स्रोत - विजय कुमार
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Tuesday, 8 October 2019

फेर खूब भेलौ जे रावण दहन / कवि - विजय कुमार

                                          दशहरा पर कविता

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अयोध्या नगरी देखि तू
ठानिकS घमंडमे चूर-चूर
रामजीके सौम्यभाव संग
लड़िकS तू भेलएँ चूर-चूर ।

निड्डर छलएँ सेहो मुदा
अहंकारी रहएँ की कम तू ?
लंका संग दशानन मुख
जरलौ खूब जो रे रावण ॥

रामजीक संग बानर सेना
आ तरकश सँ तीर निशाना
समुद्रपार दूर तोहर लंका
रामसेतु सँ दूर नै रहलौ,रावण ।

सीताजीक वृक्षक तलमे
चाल छलौ तोहर अलबेला
तत्पर हरदम हनुमान तहिना
छलमन जरलौ जो रे रावण ॥

लक्ष्मण संग सेहो सदिखन
बूटीक लेल पर्वत हाथेपर,
आनिलथि जे हनुमान सेना
सब देखलएँ तू रे लंकापति ।

गुरु विश्वामित्र शिष्य देखि
गुरूर तोहर खूब जे टुटलौ,
राम-लक्ष्मण के रीति देखि
जरूर जर तू जो रे रावण ॥

रावण जर तू फेर एक बेर
असुर मोन पड़बएँ जखने तू
जगमे सुखी सब देर-सेवर
कहि हम सब जो रे रावण ।

विजयादशमीक रामलीलामे
फेर खूब भेलौ जे रावण दहन
अदृश्य रावण जँ मरय संगहि
नव सूरज सँ मरि जो रे रावण ॥
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कवि - विजय बाबू
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Tuesday, 1 October 2019

हे माँ जगत जननी दुर्गे देवी / कवि - विजय बाबू

जय माँ भगवती

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मिथिला चित्रकला - बिमला दत्त

हे माँ जगत जननी दुर्गे देवी
अहाँक शक्तिमे हमर भक्ति
अहाँकक असीम कृपा सँ रहै सृष्टि
अहाँकक अनुकंपा सँ करि अनुभूति
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि।

हे सप्तश्लोकी नवरात्र विराजे मैया
अहाँक़ रूप अनेक, श्रद्धा हमर एक
अहाँक सोझा देवता सिर झुकावथि
अहाँक सम्मानमे अप्सरागण नाचथि गावथि
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि।

हे माँ नौ नाउसँ प्रसिद्ध जगदंबिके
अहाँक बत्तीस रूपमे रचल संसार पूर्ण
अहाँक विशाल ललाटमे पसरल रौद्ररूप
अहाँक चरणतल जे झुकल सभ असुरदल
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि ।

हे सृष्टिके पालनहारी दुर्गा माँ
अहाँक पृथक रूप आ त्रिशूलक धार
अहाँक हँ उच्चाटन तीनू लोकक पार
करी हम अहाँक मान, रखने छी बस यैह अरमान
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि।

हे जग दुःखहारिणी दुर्गा मैया
अहाँक आराधना करी नित्य हम
अहाँक पूजा करी बिनु विधि बूझने हम
हम बालक के त्रुटि क्षमा करियौ माँ
अहाँक नमस्कार बारंबार नमस्कार अछि।
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कवि - विजय बाबु
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Thursday, 26 September 2019

समय-चक्र आ फिकिरक दुहूकमे / कवि - विजय कुमार

समय-चक्र आ फिकिरक दुहूकमे

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समय अहाँ आबै छी समय सँ 
मुदा समय सँ चलियो जाई छी
समय अहाँक शिकारमे हम, आ
ब्योंत में सदिखन अहाँ रहै छी।

अहाँक सोझा आबि बूझि नै
जानी नहि हम की की पबै छी?
कतेक कुंठा सेहो गड़ल अछि
बीत सँ अहाँ दहाड़ि रहल छी

समय अहाँक अकल्पनीय परिधिमे
सब संगहि चलय, प्रयासमे छी
अहाँक राह बिनु रोड़ा, हमरा सँ जुदा
संगहि लेल झटकारि रहल छी।

मोनक कोन में दर्द एक शूल सन
हँसि दैत छी तैयो बसंतक फूल सन
काल-कालक मध्यक अंतरालमे
उमंग स्वाधीनता सँ पाबि रहल छी

समय अहाँक़ अद्वीतिय चालमे
हम बालक उम्मीद केँ सटने रहै छी 
देखू, अहि चालमे कोनो चाल चलू नै
हम शिष्ट बनि संग चलि रहल छी।
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कवि - विजय बाबू
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Wednesday, 11 September 2019

युवा प्रतिभा - विजय बाबु / शुभ भिनसर आ गुरु

श्री विजय बाबु मैथिलीमे कविता लिखबाक प्रयास कयलन्हि अछि. हिनकर मैथिलीक प्रति अनुराग केँ प्रोत्साहन देबा लेल हुनकर दू टा कविता प्रस्तुत अछि- 

 शुभ भिनसर

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अगणित अनुपम स्वागत भोरे भोरे
जीवनक चक्र चलय भोरे अनहारे
परमात्मक असीम कृपा बरसय
मनमस्त सूरजक लाली सँ प्रभात ।

मात-पिताक केर आशीर्वाद पाबि
संगहि पैघक आ गुरुक आशीर्वाद
भारतवर्ष केँ हजार सालक परम्परा
स्नान-ध्यान संग करि सूर्य नमस्कार 

छल जे दीवालीक प्रातः केँ सुप्रभात
जन्म भेल हमर जगमग रात्रि उपरांत
हरियाली बगिया में फ़ूल जे खीलल
उमंग पटना सन शहर संग गामे गाम ।

बसलौं संजुक्त परिवार संग भोरे भोरे
देखलौं गरीब गामक भिन्सर द्वारे-द्वार
रहलौं महरूम अपने परिवार के देखि
देखि शहर के भिनसर बस अपने द्वार 

बेफिक्र घूमलौं माइटे-माइट नै चप्पल
खेतक आड़ि दिस टोली भोरे-भिनसरे
दर्शन आड़ि के बदला जे सड़कक लेन
देखू कतय छी पेट खातिर भोरे भोरे ।

कखनो भेल भिनसर सँ पहिले भोर आ
कखनो भेल सूरजक किरनक उपरांत
सभ भिनसर केँ दर्पण में नित अर्पण
करि हम शुरू प्रसन्न मन अप्पन काम 
...

गुरु 

माता-पिता संग विद्यमान छथि गुरु
पल-२ डगर-२ उपस्थित छथि गुरू
मनुष्यता के लेप सँ ढाँचा बनबैत
सदैव अक्षुण्ण छथि जे हमर, ओ गुरू ।

पोथी हाथमे मुदा शब्द जुबान पर
शिक्षा के डिग्री सँ दूर हुनर जोर पर
उमंग मास्साबक, तरंग कम ने शिष्यक
छलाह एक सौं एक बढिकS ओ गुरू 

जीवनक सफरमे साम्य केँ भावमे
उत्कृष्ट सदभाव,  प्रेमक परिसीमामे,
चटकन सँ सटकन केँ मधुर यादिमे,
शब्द-२ रहत समेटल मनमे यौ गुरु ।

तेल-पानि मिलन नै, घड़ा चाहे भरल
गुरु-शिष्यक मिलान नै, बस शीश झुकल,
रहब नतमस्तक चाहे जहाँमे जतय रहब
कोटि-२ नमन छथि अटल हमर ओ गुरु 
...

कवि - विजय बाबू
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Tuesday, 27 August 2019

सखी - बहिनपा स्थापना-दिवस (24 अगस्त) के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम बेलापुर (नवी मुम्बई) मे 25.8.2019 केँ भेल / कंचन कंठ

सामाजिक कुरीति केँ विरोध करितहुँ अप्पन संस्कृति सँ अत्यधिक लगाव अछि मिथिलानीक पहचान

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सखी - बहिनपा स्थापना-दिवस 24 अगस्त कऽ दुनिया भरिमे जगह-जगह मनाओल गेल। मुदा हमसभ 25  अगस्त कऽ मनेलहुँ। मुंबई में कृष्णाष्टमी द्वारे जगह- जगह दही -हांडी आ गोपालकाळा क कारणे यातायात बाधित भ  जाइत अछि तें रवि दिन मनाओल गेल, तकर विशेषता रहल कि मुंबई जेहन महानगरमे ई "मिथिलानी द्वारा कयल गेल साइत पहिल प्रोग्राम छल, जेकर कल्पना, संयोजन आ आयोजन मात्र हम सभ सखी बहिना मिल कय केलहुँ।"

कहबियो छैक " कौन कहता है आसमां में सूराख नही होता;एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।" सच्चे जे सुनलैथ से भूरि -भूरि प्रशंसा कय यथा संभव सहयोग दैलेन्हि। हम सभ एहि कार्यक्रम के पहिलुका कार्यक्रम सभ सनक किछु मुद्दा आधारित बनेलहुँ जाहिमे सामाजिक कुरीति केँ विरोध तऽ करबाक छल मुदा अन्यान्य बात सभ पर सेहो ध्यानाकर्षित केलहुँ। 

कार्यक्रमक रूपरेखा:-
1) भगवती गीत-    समूह में
2) गणेश वंदना(नृत्य)-  शुचि
3) भगवती गीत-  श्रुति ओ साथी पाठक
4) सखी बहिनपा समूह क परिचय
5) स्वागत गान-  समूह में
6) अतिथिगणक  सम्मान
7) मुख्य अतिथि (विभारानी एवं हेमंत कुमार 'हिम') के दू शब्द
8) एकल गीत-    नेहा मिश्रा
9) कविता पाठ -   संध्या मिश्रा
10) एकल गीत-प्रियंका मिला
11) जट-जटिन नृत्य- श्रुति ओ आलोक पाठक
12) कविता पाठ- प्रियंका मिश्रा
13) नाटिका -दुलरी दिया केँ अंतर्गत मिथिलामे स्त्री जीवनक विभिन्न आयाम:
- सोहर
-चैतन्य आ शुचि केँ नाटक
-लघुकथा- कंचन कंठ
-स्वयंवर- सुलेखा दास
-जयमाल गीत-श्रीमती मालती दास
डहकन,गारि,कन्यादान, सिंदूरदान, समदाउनक गीत
15)व्यंग्य -    नीलम
16)एकल गीत -  रजनीरंजन
17)चौमासा  -   प्रेमलता झा
18) एकल गीत -  आशा पाठक
19)धन्यवादज्ञापन -   प्रियंका मिश्रा
20धन्यवादसहित चलचित्र /प्रेमक बसात केँ विश्लेषण - संध्या मिला
कार्यभार-

मंच संचालन- प्रियंका मिश्रा ओ संध्या मिश्रा
अरिपन-मधुप्रकाश
अतिथि के पुछाइर-कंचन कंठ ओ आशा पाठक
दीपक सज्जा- जया रानी आओर रजनी रंजन
खोंइछ- नीलम लाल व सुषमा मिश्रा
नाटिकामे गायन-सुलेखा दास,सुषमा मिश्रा, रजनी रंजन,आशा पाठक, मधुप्रकाश,कंचन कंठ, मालती दास , प्रियंका ओ संध्या मिश्रा।

उफ्फ्फ!
तकर बाद सखी सभ स्टौल लगौने छलथिन्ह 
1)भोजनक- पलकिया, नमकीन टिकड़ी, समोसा,कचरी,फ्रैं की, ग्रीन टी-नीलम लाल ओ लिट्टी- चटनी- कंचन कंठ
2)पोथी- पंडित महाकवि लालदासक सभ कृति(जयारानी)
3)पोथी- डा नित्यानंद लाल दासक अनुदित कृति सभ (प्रज्जवलित प्रज्ञा,अग्नि के पाँखि,मैथिली तिरूक्कुरल,राधाकृष्ण चौधरी,नैका बनिजारा,मैथिली भारतीय संविधान,
चंदना दत्तक- गंगा-स्नान
विभारानी दी -खोह सौं निकसइत ओ प्रसिद्ध कृति- क्योंकि जिद है जाकर रायल्टी ओ कैंसर चैरिटीमे दैर छथि,मिथिलाक्षरक पोथी सभ
4) हैंड एम्ब्रायडरी स्टाल- ऑर्गेनिक मिथिला पेंटेडज्वैलरी,प र्स (नूतनबाला), पिलोकवर्स, एप्लीकवर्क बेडशीट (मालती दास), सिंधी कढ़ाईक बेडशीट, साड़ी ,ब्लाउज पीस ओ सिंधी- मिथिलाक्षर के कढ़ाई कुर्ती पर जे  एखन हमर ग्रुप पर धूम मचा रहल अछि (कंचन कंठ)
5)एप्लीक वर्क बेडशीट टेबलक्लाॅथ- (रंभा झा)

एतेक पूरा हमर सभक  छोटछीन कार्यक्रम आ ओहि में सब सखीक अतुलनीय योगदान बिसरल नहि जा सकैछ। कनि-मनी हेरफेर आ गड़बड़ी केर संग हमर सभक रंगारंग कार्यक्रम उल्लेखनीय रूप सौं आनन्दमय रहल।

विभा दी के कथन एकदम सटीक छलन्हि कि "स्त्री के तऽ जन्मे अवरोध-विघ्न-बाधा सौं दू - चारि होइत प्रारंभ होइत अछि तऽ ई सब कोनो विशेष गप नहि।" ओ एतेक दूर सौं कष्ट  उठाकय एलीह तऽ कृतार्थ भऽ गेलहुँ आ हुनक प्रसिद्ध " डहकन"- मोनक साध पूरा गेलैन्ह सभ के।

दीप प्रज्जवलन केलैन्हि क्रमश: मालती दास विभारानी दी, आशा झा, विद्या सखीक मां।

हेमंतजी के उद्बोधन से प्रेरणास्पद रहल। ओ कहलाह जे मैथिलीक असली विद्वान ओहिमे पीएचडी केन्हिहार नहि बरु गाम पर रहैवाली ओ बूढ़ मिथिलानी छथि जे अनपढ़ या कम पढ़ल लिखल भेलाक बादो हर वाक्य मे दू टा सटीक फकरा जड़ि दैत छथि

संपूर्ण विश्व केँ जलवायुमे हानिकारक परिवर्तन देखैत अतिथिगणक सम्मान पाग-दोपटा के स्थान पर वृक्षारोपणक महत्व पर ध्यानाकर्षित करै के लेल एकटा के गुलाब आ गुलाबक पौधा प्रदान कैल गेल क्रमशः विभा दी, हेमंत 'हिम', रूपक शरर ओ  हुनक गायिका  पत्नी सारिका कुमार केँ वरीय सखी सभ द्वारा।

मिथिलाक्षरक प्रचार-प्रसारक महत्वपूर्ण कार्यमे योगदानक लेल निर्देशिकाक रूपमे प्रेमलता झा, माला झा, शैव्या मिश्रा केँ, प्रशिक्षिकाक रूपमे कल्पना मधुकर आ प्रवीणता प्राप्त करैलेल कंचन कंठ, रजनी रंजन आदि सम्मानित भेलीह ।

विशेष बधाईक पात्र छथि नीलम दीदी सखी जे हमर सभक यथासमय मार्गदर्शन करैत , हँसैत,फोटोग्राफी कऽ मधुर याद जमाकय राखयमे मदद करैत छथि आ मनोमालिन्य सौं कोसों दूर रहि हमरा सभमे प्राणवायु क काज करैत छथि (ई बटरिंग अछि फूड स्टाल सौं डिस्काउंट क उम्मीद मे ) 

मुक्ति सखी मुंबई आबिकय बच्चाक अस्वस्थताक कारणे नहि आबि पेलीह, हुनकर हृदयतल सौं आभार आ बौआ के शीघ्र स्वास्थ्यलाभक कामना अछि। जल्दिये भेंट होयत तकर आशा सेहो अछि।

कमाल तऽ केलैन्हि नन्हकी सखी नेहा मिश्रा सखी- जे पैर में चोट क बावजूद ओ डाक्टरके सलाहक बावजूद ऐतेक दूर सौं एबे नै केलीह "पिरीय पराननाथ" गाबि आनंद के चार हजार गुना बढ़ा देलैन्हि।

पूरा दौड़-भाग, इंतजाम बातक श्रेय वकील सखी प्रियंका ओ नीलम लाल के छन्हि। सक्रिय योगदान देबासौं असमर्थ रहितो यथासंभव मदति केनिहार संध्या ओ कंचन सखी के बधाई। ऐना कऽ कऽ एकटा मधुर यादक संगे तेल-सिनुर आ खोईंछ अपन श्रेष्ठा सखी सौं लऽ सभ गोटे मुँह में पान चिबबइत विदा भऽ गेलहुँ।

नोटपैड तक हाथ ठाढ़ कऽ देलक लेकिन लिखय लगै छी तऽ कि लिखू, कि छोड़ू से नहि बुझाइ अछि तैं गलती-सलती धियान नहि देब। आखिर साल भरिक नेना सौं कतेक अपेक्षा करब!

धन्यवाद सखी-बहिनपा ग्रुप के ओ धन्यवाद आरती सखी। हम सब अहिना फलफूली ओ गबैत रही "हम एक छी सखी -बहिनपा।" 
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आलेख - कंचन कंठ
छायाचित्र - सखी बहिनपा समूह
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